इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) ने लुटियंस दिल्ली स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड को लेकर चल रहे कानूनी विवाद को वापस ले लिया है। अब एसोसिएशन ने खेल के विकास के लिए दिल्ली में कम से कम 500 एकड़ वैकल्पिक भूमि की मांग की है।
मुख्य बातें
- इंडियन पोलो एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी मध्यस्थता याचिका वापस ले ली है।
- एसोसिएशन अब लुटियंस दिल्ली के 15.20 एकड़ जयपुर पोलो ग्राउंड के बदले 500 एकड़ जमीन की मांग कर रहा है।
- यह मांग एक विश्व स्तरीय पोलो और घुड़सवारी सुविधा स्थापित करने के लिए की गई है।
- केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक हित' का हवाला देते हुए मौजूदा मैदान का कब्जा ले लिया था।
नई दिल्ली में स्थित प्रतिष्ठित जयपुर पोलो ग्राउंड को लेकर चल रहा कानूनी संघर्ष अब एक नए मोड़ पर आ गया है। इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी वह याचिका वापस ले ली, जिसमें केंद्र सरकार के साथ भूमि विवाद को सुलझाने के लिए एक मध्यस्थ की नियुक्ति की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने एसोसिएशन को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। एसोसिएशन ने अदालत को सूचित किया कि उन्होंने 7 अगस्त को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को एक औपचारिक प्रतिवेदन भेजा है और वे अब कानूनी लड़ाई के बजाय प्रशासनिक बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि भारत में एक ऐतिहासिक खेल के अस्तित्व का है। लुटियंस दिल्ली का यह मैदान 1930 के दशक में जयपुर के महाराजा द्वारा उपहार में दिया गया था। यदि एसोसिएशन को पर्याप्त भूमि नहीं मिलती है, तो भारत में पोलो और घुड़सवारी जैसे उच्च स्तरीय खेलों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
पोलो के लिए विशाल भूमि की आवश्यकता होती है; इसे किसी छोटे खेल मैदान में नहीं खेला जा सकता।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और भाजपा सांसद नवीन जिंदल द्वारा प्रस्तुत मांग में कहा गया है कि पोलो के लिए कम से कम 500 एकड़ भूमि अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि एक एकीकृत राष्ट्रीय पोलो और घुड़सवारी केंद्र स्थापित करने के लिए इतनी बड़ी जगह आवश्यक है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जयपुर पोलो ग्राउंड का इतिहास गहरा है। इसे 1951 में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा 20 साल की लीज पर दिया गया था, जिसे बाद में कई बार बढ़ाया गया। 1983 में दिल्ली पोलो क्लब के विघटन के बाद, यह संपत्ति IPA को आवंटित की गई थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एसोसिएशन ने कानूनी लड़ाई क्यों छोड़ी?
एसोसिएशन अब सरकार के साथ बातचीत के माध्यम से एक व्यावहारिक समाधान खोजने की कोशिश कर रहा है।
2. एसोसिएशन की मुख्य मांग क्या है?
वे 15 एकड़ के मौजूदा मैदान के बदले दिल्ली में 500 एकड़ वैकल्पिक भूमि चाहते हैं।