उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और वाराणसी में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर गया है और कई रेल सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

  • लखीमपुर खीरी में जलभराव के कारण कक्षा 8 तक के सभी स्कूल बंद।
  • मैलानी-नानपारा रेल खंड पर पटरियों के डूबने से ट्रेन सेवाएं निलंबित।
  • वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर, घाटों पर अंतिम संस्कार बाधित।
  • वरुणा नदी के किनारे बसे परिवारों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया।

मंगलवार को हुई निरंतर मूसलाधार बारिश ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और वाराणसी जिलों में गंभीर जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल दैनिक आवागमन को प्रभावित किया है, बल्कि शिक्षा और अंतिम संस्कार जैसे बुनियादी कार्यों को भी बाधित कर दिया है।

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण भीरा और पलिया स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया। इसके परिणामस्वरूप, उत्तर पूर्वी रेलवे ने मीलानी-नानपारा खंड पर ट्रेन सेवाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रेलवे पीआरओ महेश गुप्ता ने पुष्टि की कि मीलानी, बिछिया और नानपारा के बीच सेवाएं 'अगले आदेश तक' बंद रहेंगी, जिससे करीब आधा दर्जन ट्रेनें प्रभावित हुई हैं।

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि तराई क्षेत्र और गंगा बेसिन में बार-बार आने वाली ये बाढ़ शहरी जल निकासी और नदी प्रबंधन की विफलता को दर्शाती है। मीलानी-नानपारा रेल लिंक का टूटना सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए एक बड़ा झटका है।

दूसरी ओर, आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर गया है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, मंगलवार सुबह 10 बजे जलस्तर 70.28 मीटर था, जो कि 70.26 मीटर के चेतावनी स्तर से अधिक है। इसका सबसे दुखद प्रभाव मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों पर देखा गया, जहाँ बाढ़ के कारण शवदाह स्थल डूब गए और लोगों को छतों और गलियों में अंतिम संस्कार करना पड़ा।

"नेपाल की पहाड़ियों में भारी बारिश और मैदानों में मानसून का संगम लखीमपुर खीरी जैसे सीमावर्ती जिलों के लिए बाढ़ के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।"

नेपाल सीमा से सटे लखीमपुर खीरी के निघासन तहसील के टिकुनिया क्षेत्र में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नेपाल से निकलने वाली मोहना और कर्नाली नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई सीमावर्ती गांवों और दुधवा नेशनल पार्क के आसपास के क्षेत्रों में खतरा मंडरा रहा है।

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण तिवारी के निर्देश पर कक्षा 8 तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। वाराणसी में जलमग्न गलियों में आवागमन के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है और वरुणा नदी के प्रभावित परिवारों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

स्थान मुख्य प्रभाव क्रिटिकल लेवल/स्थिति
वाराणसी (गंगा) घाट डूबे, नाव परिवहन 70.28मी (चेतावनी स्तर से ऊपर)
लखीमपुर खीरी रेल सेवा ठप, स्कूल बंद पटरियां जलमग्न (शारदा नदी)
क्या आप जानते हैं?: वाराणसी में अब तक का सबसे उच्चतम जलस्तर 73.901 मीटर दर्ज किया गया है, जिसे प्रशासन आपदा प्रबंधन के लिए मानक मानता है।

प्रश्न 1: लखीमपुर खीरी में कौन से रेल खंड प्रभावित हैं?
मैलानी, बिछिया और नानपारा के बीच ट्रेन सेवाएं फिलहाल निलंबित हैं।

प्रश्न 2: वाराणसी में गंगा का वर्तमान स्तर क्या है?
गंगा का स्तर 70.28 मीटर है, जो चेतावनी स्तर (70.26 मीटर) से ऊपर लेकिन खतरे के निशान (71.262 मीटर) से नीचे है।