आंध्र प्रदेश सरकार ने नगर निकायों में संपत्ति हस्तांतरण के दौरान लिए जाने वाले म्यूटेशन शुल्क में एकरूपता लाने के लिए एक नया विधेयक पारित किया है, जिससे भ्रष्टाचार कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
- आंध्र प्रदेश विधानसभा ने 'ए.पी. नगर कानून (तीसरा संशोधन) विधेयक 2026' पारित किया।
- राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में अब एक समान म्यूटेशन शुल्क (UMF) लागू होगा।
- यह कदम पंजीकरण और स्टाम्प विभाग के साथ ऑटो-म्यूटेशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उठाया गया है।
विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश विधानसभा ने सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ए.पी. नगर कानून (तीसरा संशोधन) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य नगर निकायों में संपत्ति के स्वामित्व के हस्तांतरण (म्यूटेशन) के समय वसूले जाने वाले शुल्क में मानकीकरण लाना है।
नगर प्रशासन और शहरी विकास मंत्री पी. नारायण ने विधेयक पेश करते हुए स्पष्ट किया कि इससे पहले के कानूनों, जैसे कि एपी नगर पालिका अधिनियम 1965 और नगर निगम अधिनियम 1955 में समान म्यूटेशन शुल्क (UMF) वसूलने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इस कानूनी शून्यता के कारण, राज्य के विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में शुल्क वसूली के अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे थे।
मंत्री ने बताया कि कुछ निकाय निश्चित दर स्लैब का उपयोग कर रहे थे, जबकि कुछ प्रतिशत-आधारित प्रणाली या मिश्रित मॉडल का पालन कर रहे थे। इस विसंगति के कारण न केवल नागरिकों को भ्रम होता था, बल्कि राज्य स्तर पर कोई मानक प्रक्रिया भी मौजूद नहीं थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संशोधन केवल प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम है। जब तक शुल्क संरचना समान नहीं होती, तब तक 'कंप्यूटर-एडेड एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट 2.0' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का पूर्ण कार्यान्वयन असंभव था। इस विधेयक के माध्यम से अब ऑटो-म्यूटेशन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
"समान म्यूटेशन शुल्क लागू करने से संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।"
नया विधेयक सरकार को समय-समय पर प्रतिशत-आधारित म्यूटेशन शुल्क निर्धारित करने का अधिकार देता है। इससे पंजीकरण और स्टाम्प (R&S) विभाग के साथ एक सहज एकीकरण संभव होगा, जिससे संपत्ति के हस्तांतरण के बाद नगर पालिका रिकॉर्ड में नाम बदलना एक स्वचालित प्रक्रिया बन जाएगी।
पुरानी प्रणाली बनाम नई प्रणाली
| विशेषता | पुरानी प्रणाली | नई प्रणाली (विधेयक 2026) |
|---|---|---|
| शुल्क संरचना | अलग-अलग (स्लैब/प्रतिशत) | एक समान (Uniform) |
| कानूनी आधार | स्पष्ट प्रावधान का अभाव | वैधानिक समर्थन (Statutory Backing) |
| प्रक्रिया | मैनुअल और जटिल | ऑटो-म्यूटेशन (डिजिटल) |
Frequently Asked Questions
1. म्यूटेशन शुल्क (Mutation Fee) क्या है?
यह वह शुल्क है जो संपत्ति के मालिकाना हक के बदलाव के बाद नगर पालिका के रिकॉर्ड में नाम अपडेट कराने के लिए लिया जाता है।
2. इस विधेयक से आम नागरिक को क्या लाभ होगा?
नागरिकों को अब अलग-अलग नगर निकायों में अलग-अलग शुल्क नहीं देना होगा और डिजिटल एकीकरण के कारण काम तेजी से होगा।