मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एल नीनो के प्रभाव से राज्य में भारी बारिश की कमी और जल संकट की चेतावनी दी है। उन्होंने किसानों से पानी की खपत वाली फसलों, विशेषकर धान की खेती से बचने का आग्रह किया है।
- आंध्र प्रदेश में इस वर्ष सामान्य से 36% कम बारिश का अनुमान है।
- श्रीशैलम जलाशय में पानी का प्रवाह 753 TMC के बजाय केवल 214 TMC रहा।
- धान की खेती में 1.14 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है।
- फसल बीमा नामांकन में भारी वृद्धि, कुल बीमित मूल्य ₹13,983 करोड़ पहुँचा।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को विधानसभा में एल नीनो (El Niño) के प्रभाव पर चर्चा करते हुए राज्य में गंभीर जल तनाव की चेतावनी दी। उन्होंने जनता और किसानों से जल संरक्षण की अपील की और उन क्षेत्रों में पानी की अधिक खपत वाली फसलों को न उगाने का आग्रह किया जहाँ पानी की भारी किल्लत है।
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों के जरिए स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि जून से दिसंबर 2026 के बीच राज्य में 867 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 557 मिमी का अनुमान है, जो लगभग 36 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। विशेष रूप से जुलाई में 68 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि अगस्त से नवंबर तक भी बारिश कम रहने की संभावना है।
जल संसाधनों की वर्तमान स्थिति
नायडू ने कहा कि राज्य की निर्भरता ऊपरी राज्यों (कर्नाटक और महाराष्ट्र) पर अधिक है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। जब तक ऊपरी राज्यों के जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं आता, तब तक श्रीशैलम और नागार्जुन सागर जैसे प्रमुख बांधों में पानी का स्तर नहीं बढ़ता। उदाहरण के तौर पर, श्रीशैलम में 753 TMC पानी आने की उम्मीद थी, लेकिन वास्तव में केवल 214 TMC ही आया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह संकट केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) को भी बढ़ावा दे सकता है। जब मुख्य फसलें जैसे धान और बागवानी फसलें प्रभावित होती हैं, तो बाजार में कीमतों में उछाल आता है, जिससे आम जनता की जेब पर असर पड़ता है।
"एल नीनो केवल फसलों को प्रभावित नहीं कर रहा है, बल्कि यह महंगाई बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक बन गया है। हमें दीर्घकालिक समाधान खोजने होंगे।"
कृषि क्षेत्र पर प्रभाव को कम करने के लिए सरकार सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation), प्राकृतिक और जैविक खेती और वैज्ञानिक जल प्रबंधन को बढ़ावा दे रही है। कृष्णा बेसिन के किसानों को विशेष रूप से धान की खेती न करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, रायलसीमा में संतरे, नींबू और आम जैसी बागवानी फसलें और तटीय आंध्र में नारियल और काजू के बागानों पर भी सूखे का असर पड़ सकता है।
| विवरण | पिछला सीजन | वर्तमान सीजन (2026) |
|---|---|---|
| बीमा आवेदन (लाख में) | 19.50 | 35.17 |
| गैर-ऋणी किसान नामांकन (लाख) | 2.00 | 20.35 |
| बीमित क्षेत्र (लाख हेक्टेयर) | 7.83 | 15.17 |
सरकार ने फसल बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है। इस वर्ष बीमित फसलों का कुल मूल्य ₹13,983 करोड़ तक पहुँच गया है, जिससे आंध्र प्रदेश देश में पांचवें स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने किसानों से अगस्त के अंत तक नामांकन पूरा करने की अपील की है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एल नीनो का आंध्र प्रदेश की खेती पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
इसके कारण बारिश में भारी कमी आई है, जिससे जलाशयों का जलस्तर गिरा है और धान जैसी पानी वाली फसलों के उत्पादन में जोखिम बढ़ गया है।
2. सरकार किसानों की मदद कैसे कर रही है?
सरकार सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दे रही है, फसल बीमा का विस्तार कर रही है और संकटग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुँचाने की व्यवस्था कर रही है।