अभिनेता प्रकाश राज सहित कई नागरिक समाज संगठनों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाना 'चौंकाने वाला' है।

  • कर्नाटक में 1.08 करोड़ से अधिक मतदाताओं को ASDDO (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट, अन्य) श्रेणी में रखा गया है।
  • नागरिक समूहों का आरोप है कि पूरे देश में कर्नाटक में नामों को हटाने का अनुपात सबसे अधिक है।
  • मांग की गई है कि गणना चरण को तीन महीने बढ़ाया जाए और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाए।

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़े कदम के रूप में, 'एडेलु कर्नाटक' और 'माई वोट, माई राइट' जैसे नागरिक समाज संगठनों के एक गठबंधन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को एक औपचारिक पत्र लिखा है। प्रसिद्ध अभिनेता प्रकाश राज द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा संचालित विशेष गहन संशोधन (SIR) के परिणामों को "चौंकाने वाला" बताया गया है।

विवाद का मुख्य कारण 1.08 करोड़ से अधिक मतदाताओं को ASDDO (Absent, Shifted, Dead, Duplicate, and Others) श्रेणी में वर्गीकृत करना है। संगठनों का तर्क है कि यह केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास है जिससे लाखों पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची की सटीकता किसी भी लोकतंत्र की नींव होती है। जब एक करोड़ से अधिक मतदाताओं को हटाने के लिए चिह्नित किया जाता है, तो यह प्रणालीगत जोखिम पैदा करता है। यदि बड़ी संख्या में पात्र लोग नौकरशाही की गलतियों के कारण वोट देने के अधिकार से वंचित होते हैं, तो यह भविष्य के चुनावी परिणामों की वैधता को खतरे में डाल देता है।

नागरिक समूहों ने गणना प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों की ओर इशारा किया है। उनके अनुसार, 80% से अधिक विलोपन 'स्थानांतरित', 'अनुपस्थित' और 'अन्य' श्रेणियों के अंतर्गत आते हैं। आरोप है कि कई बुजुर्गों को 'मृत' घोषित कर दिया गया है, जबकि काम के लिए बाहर गए लोगों को 'अनुपस्थित' दिखा दिया गया है। इसके अलावा, जो लोग फॉर्म सही से नहीं भर पाए, उन्हें 'अन्य' श्रेणी में डालकर विलोपन सूची में डाल दिया गया।

'संशोधन' की आड़ में लाखों मतदाताओं का व्यवस्थित निष्कासन एक लोकतांत्रिक अभ्यास को संस्थागत मताधिकार वंचित करने के उपकरण में बदलने का खतरा पैदा करता है।

इसे ठीक करने के लिए, गठबंधन ने राज्य सरकार के लिए तीन चरणों की रणनीति का प्रस्ताव दिया है: पहला, चुनाव आयोग से गणना अवधि को तीन महीने बढ़ाने का अनुरोध करना; दूसरा, यदि आयोग मना करता है, तो राज्य विधानसभा में एक औपचारिक प्रस्ताव पारित करना; और तीसरा, मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना।

पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि कर्नाटक को केंद्र सरकार को एक कड़ा राजनीतिक संदेश भेजना चाहिए। समूहों का कहना है कि राज्य SIR प्रक्रिया के ऐसे "अन्यायपूर्ण परिणाम" को स्वीकार नहीं करेगा जहां पात्र मतदाताओं के अधिकारों को छीना जा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: ASDDO श्रेणी चुनाव आयोग का एक मानक उपकरण है, लेकिन इसका गलत उपयोग भारत के उच्च न्यायालयों में बड़े कानूनी विवादों का कारण बनता है।
श्रेणी कथित त्रुटि प्रभाव
मृत (Dead) बुजुर्गों को मृत चिह्नित करना मतदान के अधिकार की स्थायी हानि
अनुपस्थित (Absent) रोजगार के लिए बाहर गए लोग प्रवासी श्रमिकों का मताधिकार छिनना
अन्य (Others) फॉर्म भरने में गलती पात्र मतदाताओं का मनमाना विलोपन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: चुनावों के संदर्भ में SIR प्रक्रिया क्या है?
विशेष गहन संशोधन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट करने की एक विस्तृत प्रक्रिया है, जिसमें नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है और मृत या डुप्लिकेट नामों को हटाया जाता है।

प्रश्न 2: नागरिक समाज समूह ASDDO श्रेणी को लेकर चिंतित क्यों हैं?
उन्हें डर है कि इस श्रेणी का उपयोग बहुत व्यापक रूप से किया जा रहा है, जिससे लाखों वैध मतदाताओं के नाम गलती से या जानबूझकर हटाए जा सकते हैं।