मैसूर मेडिकल कॉलेज और अनुसंधान संस्थान (MMC&RI) के अनुबंध कर्मियों ने तीन महीने के बकाया वेतन और उत्पीड़न के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। AIUTUC से जुड़े कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
- तीन महीने का वेतन लंबित होने के कारण MMC&RI के अनुबंध कर्मियों का विरोध प्रदर्शन।
- AIUTUC से संबद्ध यूनियन ने सुपरवाइजरों द्वारा उत्पीड़न और शोषण का आरोप लगाया।
- न्यूनतम वेतन, ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) योगदान की मांग।
मैसूर के प्रतिष्ठित मैसूर मेडिकल कॉलेज और अनुसंधान संस्थान (MMC&RI) के प्रशासनिक भवन के सामने सोमवार को माहौल तनावपूर्ण हो गया जब बड़ी संख्या में अनुबंध कर्मियों ने अपना विरोध दर्ज कराया। अखिल भारतीय यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AIUTUC) से संबद्ध MMC&RI अनुबंध श्रमिक संघ के नेतृत्व में श्रमिकों ने अपनी बुनियादी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
श्रमिकों का मुख्य आरोप है कि पिछले तीन महीनों से उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ 'स्वघोषित' सुपरवाइजर, जो निजी एजेंसियों के माध्यम से डी-ग्रुप कैडर में कार्यरत हैं, श्रमिकों को मानसिक और पेशेवर रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सरकारी संस्थानों में निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग मॉडल अक्सर जवाबदेही की कमी का कारण बनता है। जब प्रबंधन और निजी एजेंसी के बीच समन्वय टूटता है, तो सबसे अधिक मार सबसे निचले स्तर के श्रमिकों पर पड़ती है। यह मामला केवल वेतन का नहीं, बल्कि श्रम कानूनों के उल्लंघन का भी है।
AIUTUC की मैसूर जिला समिति ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह अत्यंत खेदजनक है कि श्रमिकों को नियमित वेतन पर्ची (wage slips) और उचित वर्दी प्रदान नहीं की गई है। साथ ही, उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़े EPF और ESI योगदानों में भी भारी अनियमितताएं पाई गई हैं।
न्यूनतम वेतन का भुगतान न करना और सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित रखना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह श्रम अधिनियमों का सीधा उल्लंघन है।
यूनियन अध्यक्ष चंद्रशेखर मेटी ने प्रबंधन की इस विफलता को 'गंभीर लापरवाही' और 'अन्याय' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 20 दिनों का कानूनी स्ट्राइक नोटिस पहले ही दिया जा चुका था, लेकिन प्रशासन ने बातचीत करने या शिकायतों के समाधान के लिए कोई पहल नहीं की।
इस विरोध प्रदर्शन में कर्नाटक यूनाइटेड मेडिकल एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन की अध्यक्ष एम. उमাদেवी, सचिव हरीश एस.एच. और अन्य वरिष्ठ श्रमिक नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
Frequently Asked Questions
1. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में तीन महीने के बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, न्यूनतम वेतन का निर्धारण, नियमित वेतन पर्चियां, उचित वर्दी और EPF/ESI योगदान शामिल हैं।
2. प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या रही?
रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने 20 दिन के कानूनी नोटिस के बावजूद अब तक कोई ठोस बातचीत या समाधान का प्रयास नहीं किया है।