विशेष गहन संशोधन (SIR) के बाद दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 47 लाख नाम हटाए जा सकते हैं। यह देश में सबसे अधिक विलोपन दर होगी, जिसका मुख्य कारण शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या का पलायन है।

  • दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 33% नाम हटाए जा सकते हैं।
  • 1.45 करोड़ मतदाताओं में से केवल 97.47 लाख का ही सफल सत्यापन हो पाया है।
  • दिल्ली की विलोपन दर तेलंगाना (21.59%) और उत्तर प्रदेश (18.7%) से कहीं अधिक है।
  • अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने की उम्मीद है।

देश की राजधानी अपनी मतदाता सूचियों में एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, अगले सप्ताह प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में हर तीसरा नाम हटाया जा सकता है। विशेष गहन संशोधन (SIR) के 'गणना' चरण के समाप्त होने तक, केवल 97.47 लाख मतदाताओं के फॉर्म एकत्र कर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के पोर्टल पर अपलोड किए गए थे।

इसका मतलब है कि लगभग 47.62 लाख मतदाता "अनकलेक्टिबल" (असंग्रहणीय) श्रेणी में आ गए हैं। इस श्रेणी में वे लोग शामिल हैं जो बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के घर-घर सर्वे के दौरान अनुपस्थित थे, जो शहर छोड़ चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, या जिनके नाम दो बार दर्ज थे। यह विलोपन दर दिल्ली को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पर ले आती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रवृत्ति केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के बड़े शहरों में "फ्लोटिंग पॉपुलेशन" (अस्थायी जनसंख्या) का परिणाम है। सफेदपोश पेशेवर, सरकारी कर्मचारी और प्रवासी मजदूर अक्सर अपना निवास स्थान बदलते रहते हैं, लेकिन समय पर अपना पता अपडेट नहीं कराते। गुरुग्राम और हैदराबाद जैसे शहरों में भी इसी तरह की उच्च विलोपन दर देखी गई है, जो शहरी मतदाता डेटाबेस को अपडेट रखने की प्रशासनिक चुनौती को दर्शाती है।

शहरी केंद्रों में विलोपन की उच्च दर जनसांख्यिकीय अस्थिरता को दर्शाती है, जहाँ आवासीय परिवर्तन प्रशासनिक अपडेट की तुलना में अधिक तेज़ी से होते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में BLOs ने घर-घर जाकर मतदाताओं की पात्रता की जांच की। हालांकि, फॉर्मों के डिजिटलीकरण की धीमी गति के कारण इस अभ्यास की समय सीमा को दो बार बढ़ाया गया। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक ड्राफ्ट चरण है और अंतिम सूची अक्टूबर के अंत तक तय होगी।

क्षेत्र/राज्य अनुमानित विलोपन दर
दिल्ली ~33%
हैदराबाद जिला 40.99%
गुरुग्राम 29%
तेलंगाना 21.59%
उत्तर प्रदेश 18.7%

जिन मतदाताओं के नाम 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट सूची से गायब होंगे, उन्हें 23 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर मिलेगा। ECI ने आश्वासन दिया है कि जो वास्तविक मतदाता गलती से हटा दिए गए हैं, उन्हें इस एक महीने की अवधि में नए मतदाताओं के रूप में फिर से जोड़ा जा सकता है।

क्या आप जानते हैं?: विशेष गहन संशोधन (SIR) एक कठोर प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य "घोस्ट वोटर्स" (फर्जी मतदाताओं) को हटाना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र नागरिक ही सूची में रहें ताकि चुनावी धोखाधड़ी को रोका जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: अंतिम मतदाता सूची कब प्रकाशित होगी?
सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होने की संभावना है।

प्रश्न 2: यदि मेरा नाम ड्राफ्ट सूची से गायब है तो मुझे क्या करना चाहिए?
आप 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच अपनी पात्रता साबित करने और नाम वापस जुड़वाने के लिए दावा या आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।