दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन (IPNA) की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को दो महीने के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह मामला नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन (NNMC) के गठन में हो रही देरी से जुड़ा है।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने IPNA के प्रतिवेदन पर केंद्र को 2 महीने का समय दिया।
  • NNMC अधिनियम 2023 का उद्देश्य 77 साल पुराने भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम को बदलना है।
  • RTI से खुलासा हुआ कि जुलाई 2026 तक आयोग में कोई नियुक्ति या भर्ती नहीं हुई है।
  • देरी का सीधा असर नर्सिंग शिक्षा और नागरिकों के 'स्वास्थ्य के अधिकार' पर पड़ रहा है।

एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (17 अगस्त, 2026) को केंद्र सरकार को भारतीय प्रोफेशनल नर्सेज एसोसिएशन (IPNA) द्वारा प्रस्तुत एक प्रतिवेदन पर दो महीने के भीतर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। यह याचिका नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन (NNMC) अधिनियम, 2023 के कार्यान्वयन की मांग कर रही है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो IPNA के पास अदालत में फिर से आने की स्वतंत्रता होगी। वकील रॉबिन राजू द्वारा दायर इस याचिका में NNMC के गठन और अधिनियम को लागू करने में हो रही अत्यधिक देरी को चुनौती दी गई है।

नियामक शून्यता और प्रशासनिक विफलता

NNMC अधिनियम को 77 साल पुराने भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम की जगह लेने और नर्सिंग एवं मिडवाइफरी शिक्षा के मानकों को विनियमित करने के लिए एक आधुनिक प्रणाली स्थापित करने के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम को अगस्त 2023 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी और फरवरी 2024 में इसके प्रावधान लागू कर दिए गए थे।

हैरानी की बात यह है कि 7 जुलाई, 2026 को केंद्र से प्राप्त एक RTI जवाब में यह स्वीकार किया गया कि NNMC का गठन अभी तक नहीं हुआ है और आयोग के लिए कोई नियुक्ति या भर्ती नहीं की गई है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब केंद्र ने मार्च 2024 में ही पदों के लिए आवेदन आमंत्रित कर लिए थे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि NNMC के गठन में देरी केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि एक प्रणालीगत विफलता है। जबकि अन्य स्वास्थ्य देखभाल व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय नियामक आयोग पहले ही गठित किए जा चुके हैं, नर्सिंग क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया है। IPNA का तर्क है कि यह भेदभावपूर्ण है और सीधे तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

"नर्सों के लिए एक आधुनिक नियामक निकाय की अनुपस्थिति सीधे तौर पर रोगी देखभाल की गुणवत्ता और लाखों स्वास्थ्य कर्मियों के पेशेवर विकास को कमजोर करती है।"

एसोसिएशन ने मौजूदा भारतीय नर्सिंग परिषद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें नर्स पंजीकरण और ट्रैकिंग सिस्टम (NRTS) पोर्टल की विफलता और शिकायत निवारण तंत्र की कमी शामिल है।

विशेषता भारतीय नर्सिंग परिषद (पुराना) NNMC (प्रस्तावित नया)
कानून की अवधि 77 वर्ष पुराना आधुनिक (2023 अधिनियम)
नियामक दृष्टिकोण पारंपरिक/पुराना मानकीकृत/समकालीन
वर्तमान स्थिति अप्रभावी सिस्टम (NRTS) अभी तक गठित नहीं हुआ
क्या आप जानते हैं?: नर्सिंग पेशे को स्वास्थ्य सेवा की 'रीढ़' कहा जाता है, फिर भी भारत में इसका प्राथमिक नियामक कानून 2023 के अधिनियम से पहले लगभग आठ दशकों तक नहीं बदला गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: NNMC अधिनियम 2023 क्या है?
यह भारत में नर्सिंग और मिडवाइफरी शिक्षा के मानकों को आधुनिक बनाने के लिए भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम को बदलने वाला कानून है।

प्रश्न 2: IPNA ने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया?
क्योंकि सरकार ने कानून पारित करने और आवेदन आमंत्रित करने के बावजूद आयोग का गठन नहीं किया और न ही नियुक्तियां कीं।