जनगणना 2027 के नए प्रश्नावली में माता-पिता के धर्म, जन्मस्थान और जाति जैसे संवेदनशील डेटा को शामिल किया गया है। इसमें डिजिटल साक्षरता और आधार जैसे कई नए सवाल भी जोड़े गए हैं।

  • माता-पिता के धर्म और गांव स्तर तक के जन्मस्थान की जानकारी मांगी जाएगी।
  • जाति के लिए 'ओपन फील्ड' विकल्प के साथ 'जाति नहीं बताना चाहते' का विकल्प भी मौजूद है।
  • 2011 की तुलना में इस बार 13 नए सवाल जोड़े गए हैं, जिनमें आधार और डिजिटल साक्षरता शामिल है।
  • लद्दाख और अन्य पहाड़ी राज्यों में जनगणना का परीक्षण पहले ही शुरू हो चुका है।

भारत की आगामी जनगणना 2027 के लिए तैयार की गई प्रश्नावली ने एक बार फिर देश में डेटा गोपनीयता और सामाजिक वर्गीकरण को लेकर बहस छेड़ दी है। हाल ही में जारी किए गए दस्तावेजों से पता चला है कि इस बार जनसंख्या गणना के दौरान न केवल व्यक्तिगत जानकारी, बल्कि माता-पिता के धर्म, जन्म तिथि और उनके जन्मस्थान (गांव स्तर तक) की विस्तृत जानकारी भी मांगी जाएगी।

प्रश्नावली के 'पारिवारिक विवरण' (Family Particulars) अनुभाग के तहत, यदि माता-पिता का जन्म भारत के बाहर हुआ है, तो उनके जन्मस्थान का विवरण दर्ज करने का विकल्प भी दिया गया है। धर्म के मामले में, हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, मुस्लिम और जैन के अलावा, उत्तरदाताओं को 'अन्य धर्म' चुनने की सुविधा भी दी गई है।

जाति गणना पर विवाद

इस जनगणना का सबसे चर्चित हिस्सा जाति गणना (Caste Enumeration) है। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उत्तरदाताओं के लिए एक पूर्व-निर्धारित ड्रॉप-डाउन मेनू होगा, लेकिन अन्य सभी श्रेणियों के लिए एक 'ओपन फील्ड' दिया गया है जहाँ उन्हें अपनी जाति का नाम स्वयं टाइप करना होगा। इसके अलावा, 'जाति नहीं बताना चाहते' और 'कोई जाति नहीं' जैसे विकल्प भी दिए गए हैं।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर आरोप लगाया है कि 'ओपन फील्ड' पद्धति का उपयोग करके सरकार वास्तव में जाति जनगणना के विचार को विफल करने की कोशिश कर रही है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पद्धति तकनीकी रूप से डेटा के मानकीकरण को कठिन बना सकती है, क्योंकि खुले बॉक्स में अलग-अलग वर्तनी (spellings) के कारण सटीक सांख्यिकीय विश्लेषण करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Why This Matters

यह डेटा केवल जनसंख्या की गिनती नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सरकारी योजनाओं, आरक्षण नीतियों और सामाजिक न्याय के ढांचे को निर्धारित करेगा। नए जोड़े गए सवाल जैसे कि आधार नंबर, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और कोविड-19 टीकाकरण का विवरण, इस डेटा को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के बेहद करीब ले आते हैं, जिससे गोपनीयता संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सितंबर 2026 में घर-घर जाकर गणना का कार्य शुरू होगा, जबकि शेष भारत में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में शुरू की जाएगी।

Did You Know?: 2011 की जनगणना में केवल 29 सवाल थे, जबकि 2027 की जनगणना में यह संख्या बढ़कर 40 हो गई है।

Frequently Asked Questions

1. क्या जाति बताना अनिवार्य है?
नहीं, उत्तरदाताओं के पास 'जाति नहीं बताना चाहते' का विकल्प चुनने की सुविधा है।

2. कौन से नए सवाल जोड़े गए हैं?
डिजिटल साक्षरता, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक खातों की संख्या और कोविड-19 टीकाकरण जैसे 13 नए सवाल जोड़े गए हैं।