संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते का कड़ा विरोध करते हुए सभी FTAs को रद्द करने की मांग की है। संगठन ने सांसदों और विधायकों से ग्रामीण संकट के खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया है।

  • भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का कड़ा विरोध और सभी FTAs को रद्द करने की मांग।
  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर MSP के लिए कानूनी गारंटी की मांग।
  • ग्रामीण ऋण माफी और किसान आत्महत्या पीड़ितों के परिवारों के लिए ₹25 लाख मुआवजे का प्रस्ताव।
  • कॉर्पोरेट नियंत्रण और कृषि के 'आर्थिक उपनिवेशीकरण' के खिलाफ चेतावनी।

नई दिल्ली: लगभग 500 किसान संगठनों के संयुक्त मंच, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने देश के सभी सांसदों और विधायकों को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है। इस पत्र के माध्यम से मोर्चा ने किसानों और श्रमिकों के सामने मौजूद 'गहरे कृषि, आर्थिक और सामाजिक संकट' की ओर सरकार और जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया है। SKM ने विशेष रूप से प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के खिलाफ आवाज उठाने और मौजूदा सभी मुक्त व्यापार समझौतों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।

मोर्चे का तर्क है कि मुक्त व्यापार समझौते भारत के लिए 'आर्थिक उपनिवेशीकरण' का एक ब्लूप्रिंट हैं। उनका मानना है कि इन समझौतों के कारण कृषि उत्पादों का आयात बढ़ेगा, जिससे घरेलू कृषि की व्यवहार्यता समाप्त हो जाएगी। इससे न केवल खाद्य प्रसंस्करण बाजारों पर विदेशी कब्जा होगा, बल्कि फसलों के पैटर्न में भी बदलाव आएगा, जो अंततः भारत की खाद्य आत्मनिर्भरता को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विरोध केवल व्यापारिक शर्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की खाद्य संप्रभुता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के अस्तित्व की लड़ाई है। यदि कृषि बाजार पूरी तरह से वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए खोल दिए जाते हैं, तो छोटे और सीमांत किसान अंतरराष्ट्रीय सब्सिडी वाले उत्पादों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।

SKM ने अपनी मांगों में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी रूप देने और सभी फसलों की गारंटीकृत खरीद सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इसके अलावा, ग्रामीण ऋणग्रस्तता को समाप्त करने के लिए व्यापक ऋण माफी और किसान आत्महत्या के शिकार परिवारों के लिए ₹25 लाख के मुआवजे की मांग की गई है।

मुक्त व्यापार समझौते अक्सर औद्योगिक लाभ के लिए कृषि क्षेत्र की बलि देते हैं, जो विकासशील देशों में खाद्य असुरक्षा का कारण बन सकता है।

श्रमिकों के अधिकारों को लेकर भी मोर्चा ने कड़े रुख अपनाया है। उन्होंने चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को रद्द करने, सभी श्रमिकों के लिए ₹31,000 का न्यूनतम वेतन निर्धारित करने और MGNREGA को बहाल कर 200 दिनों के काम और ₹700 दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही, ड्राफ्ट बिजली विधेयक, बीज विधेयक 2025 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के ड्राफ्ट को वापस लेने का आग्रह किया गया है।

एक और गंभीर आरोप भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साइलो (Silos) के प्रबंधन को लेकर लगाया गया है। SKM का दावा है कि अडानी और लीप इंडिया की एक डुओपॉली विकसित हो गई है, जिसके कारण 77.5% अनाज इन दो कंपनियों के नियंत्रण में होगा। मोर्चा ने इसे कृषि का 'कॉर्पोरेट टेकओवर' करार देते हुए इसके खिलाफ कड़ा प्रतिरोध करने का संकल्प लिया है।

क्या आप जानते हैं?: स्वामीनाथन आयोग ने MSP को उत्पादन की लागत का कम से कम 50% लाभ जोड़ने की सिफारिश की थी, जिसे आज भी भारत के करोड़ों किसान कानूनी अधिकार के रूप में मांग रहे हैं।

Frequently Asked Questions

1. SKM मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का विरोध क्यों कर रहा है?
SKM का मानना है कि FTA से विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ेगा, जिससे स्थानीय किसानों की आय घटेगी और भारत की खाद्य आत्मनिर्भरता खतरे में पड़ जाएगी।

2. किसानों की मुख्य वित्तीय मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में स्वामीनाथन आयोग आधारित MSP की कानूनी गारंटी, पूर्ण ऋण माफी और आत्महत्या पीड़ितों के परिवारों को ₹25 लाख का मुआवजा शामिल है।