भारत के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी जनरल एटोमिक्स के साथ 1,943 करोड़ रुपये का समझौता किया है। इसके तहत भारतीय नौसेना अपनी समुद्री निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लेगी।
- भारत ने जनरल एटोमिक्स के साथ 1,943 करोड़ रुपये का लीज समझौता किया है।
- दो MQ-9B सी गार्डियन हाई-अल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन भारतीय नौसेना में शामिल होंगे।
- यह अनुबंध 30 महीने की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है।
भारत के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को अमेरिकी रक्षा दिग्गज जनरल एटोमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौता किया है। इस सौदे के तहत, भारतीय नौसेना 1,943 करोड़ रुपये की लागत से दो MQ-9B सी गार्डियन रिमोटली-पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) लीज पर लेगी। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह अनुबंध रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) की उपस्थिति में संपन्न हुआ। गौरतलब है कि भारतीय नौसेना पहले से ही दो सी गार्डियन ड्रोन का संचालन कर रही है, जिन्हें कुछ साल पहले लीज पर लिया गया था। नए ड्रोन के आने से नौसेना की निगरानी क्षमता दोगुनी हो जाएगी, जिससे समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सौदा?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह सौदा केवल उपकरणों की खरीद नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की एक सोची-समझी रणनीति है। MQ-9B ड्रोन अपनी लंबी उड़ान क्षमता और उच्च-रिजोल्यूशन सेंसर के कारण दुश्मन की गतिविधियों को सैकड़ों मील दूर से ट्रैक करने में सक्षम हैं।
"MQ-9B जैसे उच्च-क्षमता वाले ड्रोन का उपयोग भारत को समुद्री डोमेन जागरूकता में एक निर्णायक बढ़त प्रदान करता है, जिससे वास्तविक समय में खुफिया जानकारी प्राप्त करना संभव होता है।"
ये ड्रोन अत्याधुनिक सेंसर और परिष्कृत पेलोड से लैस हैं, जो इन्हें गहरे समुद्र में निगरानी और टोही मिशनों के लिए आदर्श बनाते हैं। यह प्रणाली व्यापक समुद्री क्षेत्रों में निरंतर खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) कवरेज प्रदान करेगी, जिससे भारत की प्रतिक्रिया क्षमता में तेजी आएगी।
| विशेषता | MQ-9B सी गार्डियन | पारंपरिक निगरानी विमान |
|---|---|---|
| उड़ान अवधि | अत्यधिक लंबी (HALE) | सीमित |
| संचालन | रिमोटली पायलटेड | मानव पायलट अनिवार्य |
| मुख्य उपयोग | ISR और समुद्री निगरानी | गश्ती और परिवहन |
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए अमेरिका के साथ रक्षा संबंधों को गहरा किया है। यह लीज समझौता एक अंतरिम व्यवस्था है जो भारत को पूर्ण स्वामित्व वाले ड्रोन प्राप्त करने तक अपनी परिचालन तैयारियों को बनाए रखने में मदद करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. MQ-9B ड्रोन की मुख्य विशेषता क्या है?
यह एक हाई-अल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन है जो उन्नत सेंसर और पेलोड के साथ लंबी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम है।
2. यह समझौता कितने समय के लिए है?
यह लीज अनुबंध 30 महीने की अवधि के लिए हस्ताक्षरित किया गया है।