हिंद महासागर में अपनी निगरानी क्षमता को मजबूत करने के लिए भारत ने अमेरिका से दो और MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लेने का निर्णय लिया है, जिससे समुद्री सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

  • भारत ने 1,943 करोड़ रुपये के सौदे के तहत दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लिए हैं।
  • ये ड्रोन 440 किमी/घंटा की रफ्तार और 11,000 किमी की प्रभावशाली रेंज से लैस हैं।
  • मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना है।

भारतीय नौसेना अपनी समुद्री निगरानी क्षमताओं को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है। अमेरिका के साथ हुए एक रणनीतिक समझौते के तहत, भारत अब दो और MQ-9B सी गार्डियन (SeaGuardian) ड्रोन अपने बेड़े में शामिल करेगा। यह कदम न केवल भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगा, बल्कि हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा।

इन ड्रोन की तकनीकी विशेषताएं इन्हें दुनिया के सबसे घातक निगरानी उपकरणों में से एक बनाती हैं। 440 किमी/घंटा की अधिकतम गति और 11,000 किमी की परिचालन सीमा के साथ, ये ड्रोन लंबी दूरी तक बिना रुके गश्त कर सकते हैं। इनकी उन्नत सेंसर प्रणाली और रडार तकनीक समुद्र की गहराई में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों और जहाजों का सटीक पता लगाने में सक्षम है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह अधिग्रहण केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक अनिवार्यता है। दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक चीन के 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' (String of Pearls) विजन के जवाब में, भारत को ऐसे उपकरणों की आवश्यकता है जो रीयल-टाइम इंटेलिजेंस प्रदान कर सकें। ये ड्रोन भारत को 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे।

"MQ-9B का आगमन भारतीय नौसेना की ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस) क्षमताओं में एक गुणात्मक छलांग है, जो समुद्री डोमेन जागरूकता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।"

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध पिछले एक दशक में काफी गहरे हुए हैं। MQ-9B ड्रोन का सौदा इसी व्यापक रक्षा सहयोग का हिस्सा है। इससे पहले भी भारत ने अमेरिका के साथ विभिन्न सैन्य समझौतों (जैसे BECA) पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि उच्च-स्तरीय सैन्य डेटा और तकनीक का आदान-प्रदान सुगम हो सके।

विशेषताMQ-9B सी गार्डियन
रफ्तार440 किमी/घंटा
रेंज11,000 किमी
मुख्य भूमिकासमुद्री निगरानी और ISR
सौदे की कीमत1,943 करोड़ रुपये (लीज)
क्या आप जानते हैं?: MQ-9B ड्रोन को 'आसमानी बाज' भी कहा जाता है क्योंकि यह घंटों तक हवा में रहकर एक छोटे से लक्ष्य को भी ट्रैक कर सकता है।

Frequently Asked Questions

1. MQ-9B ड्रोन भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये ड्रोन हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पैठ को रोकने और समुद्री सीमाओं की सटीक निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

2. इस सौदे की कुल लागत क्या है?
भारत ने इन दो ड्रोन को लीज पर लेने के लिए लगभग 1,943 करोड़ रुपये का करार किया है।