इडुक्की के एक किसान और उनके कर्मचारी ने मिलकर बंदरों के आतंक से फसल बचाने के लिए एक अनोखा जिपलाइन सिस्टम तैयार किया है, जो अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • इडुक्की के वट्टवडा में बंदरों द्वारा फसलों की तबाही रोकने के लिए पुतलों वाली जिपलाइन का उपयोग।
  • पर्यटन स्थलों की जिपलाइन से प्रेरित होकर कर्मचारी के.वी. सुब्रमण्य ने यह विचार विकसित किया।
  • यह कम लागत वाला समाधान प्रभावी साबित हुआ है, जिससे पड़ोसी किसान भी इसे अपनाने की योजना बना रहे हैं।

केरल के इडुक्की जिले के वट्टवडा में, जहां ठंडे मौसम की सब्जियां उगाई जाती हैं, वहां के किसान लंबे समय से बोनेट मकाक (Bonnet macaques) बंदरों के आतंक से जूझ रहे थे। इन बंदरों के झुंड पास के जंगलों से आते हैं और फसल कटाई से ठीक पहले पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए खेत मालिक वी.पी.एस. सेतुरामन और उनके कर्मचारी के.वी. सुब्रमण्य ने एक बेहद रचनात्मक तरीका अपनाया।

सुब्रमण्य ने पास के एक पर्यटन स्थल पर जिपलाइन देखी और उसे खेती में लागू करने का विचार किया। उन्होंने खेत के आर-पार दो लोहे की छड़ों के सहारे एक अस्थायी केबल बिछाई और उस पर पुतले (puppets) लगा दिए। जैसे ही बंदर खेत में प्रवेश करते हैं, सुब्रमण्य रस्सी खींचते हैं, जिससे पुतले तेजी से केबल पर फिसलते हुए नीचे आते हैं। इस अचानक हलचल और शोर से डरकर बंदर तुरंत खेत छोड़कर भाग जाते हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this incident highlights the growing desperation of farmers facing human-wildlife conflict. While traditional methods often fail, low-cost, psychological deterrents are becoming the new frontline of defense in rural Kerala. However, the fact that monkeys simply shifted to neighboring farms suggests that localized solutions may only push the problem elsewhere rather than solving the root cause.

"The shift in wildlife behavior indicates that animals are becoming bolder, requiring farmers to innovate beyond traditional fences to protect their livelihoods."

यह पहली बार नहीं है जब इडुक्की में बंदरों को डराने के लिए रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया गया हो। 2022 में, केरल-तमिलनाडु सीमा पर स्थित कुम्बुमेट्टु पुलिस स्टेशन ने परिसर में रबर के सांप रखे थे। हालांकि, बंदरों ने जल्द ही पहचान लिया कि वे नकली थे और वापस लौट आए। इसके विपरीत, जिपलाइन का गतिशील स्वभाव बंदरों को अधिक भ्रमित और भयभीत करता है।

वन विभाग द्वारा पिछले साल किए गए 45 दिनों के एक अभियान में यह पाया गया कि बोनेट मकाक, मालाबार जाइंट स्क्विरल और जंगली सूअर राज्य में फसल नुकसान के मुख्य कारण हैं। ये प्रजातियां, जिन्हें पहले कम हानिकारक माना जाता था, अब मानव-वन्यजीव संघर्ष के केंद्र में हैं।

क्या आप जानते हैं?: बोनेट मकाक मुख्य रूप से दक्षिण भारत में पाए जाते हैं और अपनी उच्च बुद्धिमत्ता के कारण बहुत जल्दी इंसानी चालों को समझ लेते हैं।
विधि प्रभावशीलता स्थायित्व
रबर के सांप अल्पकालिक (बंदर पहचान लेते हैं) कम
जिपलाइन पुतले उच्च (गति और शोर के कारण) मध्यम
पारंपरिक बाड़ सीमित (बंदर कूद सकते हैं) उच्च

Frequently Asked Questions

1. क्या यह जिपलाइन सिस्टम बंदरों को स्थायी रूप से हटा सकता है?
नहीं, यह केवल एक डराने वाला तरीका है। जैसा कि देखा गया, बंदर अब पड़ोसी खेतों में जा रहे हैं।

2. वट्टवडा में मुख्य रूप से कौन सी फसलें उगाई जाती हैं?
वट्टवडा अपनी ठंडे मौसम की सब्जियों (Cool-season vegetables) के लिए प्रसिद्ध है।