कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन ने राज्यव्यापी छापेमारी में हॉस्टलों, होटलों और ढाबों की गहन जांच की है। इस अभियान में शॉर्मा और कबाब के कई नमूने असुरक्षित पाए गए हैं, जिसके बाद भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

  • कर्नाटक में 960 से अधिक हॉस्टलों और सैकड़ों ईटरीज की गहन जांच की गई।
  • शॉर्मा और कबाब के कई नमूने लैब टेस्ट में 'असुरक्षित' घोषित किए गए।
  • नियमों के उल्लंघन पर कुल 6 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया।
  • सैकड़ों किलोग्राम सड़ा हुआ मांस और घटिया गुणवत्ता वाला तेल जब्त किया गया।

कर्नाटक खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन ने राज्य भर में खाद्य स्वच्छता और मानकों को सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया है। इस कार्रवाई के दायरे में केवल बड़े होटल ही नहीं, बल्कि हॉस्टल, सड़क किनारे चलने वाले ढाबे, स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और ई-कॉमर्स गोदाम भी शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले खाद्य व्यवसाय संचालकों पर नकेल कसना है।

जांच के दौरान विशेष रूप से स्ट्रीट फूड पर ध्यान केंद्रित किया गया। विभाग ने 41 शॉर्मा और 21 कबाब के नमूनों का परीक्षण किया, जिनमें से 9 शॉर्मा और 1 कबाब का नमूना पूरी तरह से असुरक्षित पाया गया। इन नमूनों में अस्वास्थ्यकर प्रथाओं और कृत्रिम रंगों के उपयोग की पुष्टि हुई है, जिसके बाद संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट फूड की बढ़ती लोकप्रियता के बीच स्वच्छता मानकों की अनदेखी एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकती है। जब सरकारी हॉस्टलों और आंगनवाड़ी केंद्रों जैसे संवेदनशील स्थानों पर भी नमूने लिए जा रहे हैं, तो यह संकेत देता है कि खाद्य सुरक्षा की समस्या केवल निजी विक्रेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थागत स्तर पर भी मौजूद है।

"खाद्य सुरक्षा केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति एक नैतिक जिम्मेदारी है, जिसकी अनदेखी गंभीर महामारी को जन्म दे सकती है।"

अभियान के आंकड़ों पर नजर डालें तो 629 पिछड़ा वर्ग हॉस्टलों और 331 समाज कल्याण विभाग के हॉस्टलों से कुल 2,416 नमूने एकत्र किए गए। इसके अलावा, 186 बस स्टेशनों पर 889 प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिनमें से 206 को नोटिस जारी किए गए और 55,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। हाईवे पर स्थित 99 ढाबों पर भी कार्रवाई की गई, जहां 3.67 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।

ई-कॉमर्स सेक्टर भी इस दायरे से नहीं बचा। 236 खाद्य गोदामों के निरीक्षण के दौरान 44 के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई और 8 गोदामों पर अस्वास्थ्यकर स्थितियों के लिए 1.97 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, तमिलनाडु से आने वाले दूध के नमूनों की जांच में एक नमूना घटिया स्तर का पाया गया।

क्षेत्र/श्रेणी निरीक्षण संख्या/नमूने मुख्य परिणाम/कार्रवाई
शॉर्मा और कबाब 62 नमूने 10 नमूने असुरक्षित पाए गए
सरकारी हॉस्टल 960 हॉस्टल 2,416 नमूने एकत्र
हाईवे ढाबे 99 ढाबे 3.67 लाख रुपये जुर्माना
ई-कॉमर्स गोदाम 236 गोदाम 1.97 लाख रुपये जुर्माना

इस पूरी कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने भारी मात्रा में दूषित खाद्य सामग्री जब्त की। इसमें 429 किलोग्राम मटन और चिकन, 203 किलोग्राम मछली, 200 किलोग्राम शाकाहारी भोजन और 49 लीटर इस्तेमाल किया हुआ या गैर-मानक कुकिंग ऑयल शामिल है। बेंगलुरु के लग्जरी होटलों और अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट्स में भी जांच की गई, जहां 30 संचालकों को नोटिस जारी किए गए।

क्या आप जानते हैं?: FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) भारत में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री को विनियमित करने वाली सर्वोच्च संस्था है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य राज्य भर में खाद्य स्वच्छता मानकों की जांच करना और असुरक्षित भोजन बेचने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना था।

प्रश्न 2: किन खाद्य पदार्थों को सबसे अधिक असुरक्षित पाया गया?
उत्तर: जांच में शॉर्मा और कबाब के नमूने सबसे अधिक असुरक्षित पाए गए, जिनमें कृत्रिम रंगों और अस्वास्थ्यकर तरीकों का इस्तेमाल किया गया था।