कोडुंगयुर के निवासियों ने पेरम्बुर विधायक के कार्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें सीवरेज, सड़कों और स्ट्रीट लाइटों की तत्काल मांग की गई। संपत्ति कर भुगतान के बावजूद कानूनी विवादों के कारण विकास कार्य रुके हुए हैं।

  • कोडुंगयुर के वार्ड 36 के निवासियों ने बुनियादी नागरिक सुविधाओं की कमी के खिलाफ विरोध किया।
  • मुख्य मांगों में सीवर नेटवर्क का निर्माण, पक्की सड़कें और स्ट्रीट लाइटें शामिल हैं।
  • ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने देरी का कारण लंबित मुकदमे और गैर-अनुमोदित लेआउट को बताया है।

जनता के आक्रोश के बीच, कोडुंगयुर के निवासियों के एक बड़े समूह ने सोमवार को पेरम्बुर विधायक के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बाला एवेन्यू रेजिडेंशियल एरिया, वेदांत मुरुगप्पा नायकन स्ट्रीट और सेलावोयल जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास में हो रही देरी पर गहरा रोष व्यक्त किया। निवासियों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने उनके इलाके को जोखिम क्षेत्र में बदल दिया है।

इस समस्या का सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि वार्ड 36 के निवासी ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) को नियमित रूप से संपत्ति कर (Property Tax) दे रहे हैं, लेकिन उन्हें वे सुविधाएं नहीं मिल रही हैं जिनके लिए यह कर लिया जाता है। इस प्रशासनिक विफलता के कारण लगभग 150 परिवार बिना बुनियादी स्वच्छता और सुरक्षा के रहने को मजबूर हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह स्थिति शहरी शासन में एक गंभीर खामी को उजागर करती है, जहाँ 'गैर-अनुमोदित लेआउट' जैसे कानूनी तकनीकी शब्दों का उपयोग स्वच्छता जैसी बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं को रोकने के लिए एक ढाल के रूप में किया जाता है। जब एक नगर निकाय कर राजस्व स्वीकार करता है लेकिन भूमि-अनुमोदन के आधार पर बुनियादी ढांचे से इनकार करता है, तो यह एक कानूनी और नैतिक शून्य पैदा करता है।

स्वास्थ्य संबंधी खतरे विशेष रूप से चिंताजनक हैं। निवासी वरुण कुमार के अनुसार, सीवेज के जमाव ने संक्रामक रोगों के लिए प्रजनन स्थल बना दिया है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही, स्ट्रीट लाइटों की कमी ने रात के समय महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

"किसी स्थानीय निकाय द्वारा संपत्ति कर स्वीकार करना बुनियादी सेवाएं प्रदान करने का एक निहित अनुबंध है, चाहे लेआउट की अनुमोदन स्थिति कुछ भी हो।"

इस विरोध के जवाब में, GCC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि देरी का कारण एक लंबित दीवानी मामला और लेआउट पर अदालत द्वारा लगाया गया स्टे (Stay) है। हालांकि जोनल अधिकारी और हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की है, लेकिन निवासियों को समाधान के लिए दो सप्ताह और इंतजार करने को कहा गया है—जो कि स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए अपर्याप्त है।

क्या आप जानते हैं?: दुनिया भर के कई शहरी केंद्रों में 'गैर-अनुमोदित कॉलोनियों' के निवासी अक्सर 'बिना प्रतिनिधित्व के कराधान' के संकट का सामना करते हैं, जहाँ वे उन सेवाओं के लिए भुगतान करते हैं जो उन्हें कभी नहीं मिलतीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: GCC कोडुंगयुर में बुनियादी ढांचे के काम में देरी क्यों कर रहा है?
GCC का कहना है कि आवासीय लेआउट अनुमोदित नहीं है और वहां एक दीवानी मामला लंबित है, जिसके कारण अदालत ने विकास कार्य पर रोक लगा रखी है।

p>प्रश्न 2: विरोध कर रहे निवासियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
निवासी बीमारियों को रोकने के लिए तत्काल सीवर नेटवर्क की स्थापना, उचित सड़कों के निर्माण और सुरक्षा के लिए स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग कर रहे हैं।