एक संसदीय स्थायी समिति ने तेलंगाना में चिकित्सा उपचार की बढ़ती लागत के लिए निजी स्वास्थ्य सेवा के बढ़ते प्रभाव और सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की कमी को जिम्मेदार ठहराया है।

  • तेलंगाना में औसतन एक बार अस्पताल में भर्ती होने का खर्च ₹55,000 है, जो देश में सबसे अधिक में से एक है।
  • निजी अस्पतालों का इलाज सरकारी सुविधाओं की तुलना में 5 से 10 गुना अधिक महंगा है।
  • सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों और विशेषज्ञों की कमी मरीजों को निजी क्षेत्र की ओर धकेल रही है।
  • फैमिली फिजिशियन और रेफरल सिस्टम के टूटने से बड़े अस्पतालों पर बोझ बढ़ा है।

राज्यसभा की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक हालिया रिपोर्ट ने तेलंगाना में स्वास्थ्य देखभाल खर्चों में खतरनाक वृद्धि पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च लगभग ₹55,000 है, जो इसे भारत के सबसे महंगे राज्यों में से एक बनाता है।

‘सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की वहनीयता और पहुंच’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में नेशनल सैंपल सर्वे (NSS) के 80वें दौर के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि तेलंगाना में इलाज का खर्च ओडिशा (₹22,000) और मिजोरम जैसे राज्यों की तुलना में काफी अधिक है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल कीमतों का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण मॉडल की विफलता है। जब सरकारी बुनियादी ढांचा मांग को पूरा नहीं कर पाता, तो निजी क्षेत्र इस कमी को पूरा करता है, लेकिन इतनी अधिक कीमत पर कि मध्यम और निम्न आय वाले परिवार कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। निजी इक्विटी-वित्त पोषित स्वास्थ्य मॉडल अक्सर मरीजों की वहनीयता के बजाय मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं।

राज्य/सुविधा का प्रकार औसत खर्च (INR)
तेलंगाना (औसत) ₹55,000
तमिलनाडु ₹52,000
केरल/कर्नाटक ₹40,000 - ₹45,000
ओडिशा ₹22,000
सरकारी अस्पताल (राष्ट्रीय औसत) ₹6,631
निजी अस्पताल (राष्ट्रीय औसत) ₹50,508

समिति ने विशेष रूप से गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग और किडनी फेल्योर के मामले में निजी अस्पतालों के अत्यधिक खर्च पर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, निजी उपचार सरकारी सुविधाओं की तुलना में 10 गुना तक महंगा हो सकता है, जिससे गरीब मरीजों के लिए जीवन रक्षक उपचार पहुंच से बाहर हो जाता है।

"पारंपरिक फैमिली फिजिशियन और रेफरल सिस्टम लगभग खत्म हो गया है, जिसके कारण मरीज छोटी बीमारियों के लिए भी सीधे विशेषज्ञों के पास जाते हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है।" - डॉ. रंगा रेड्डी बुर्री

इस समस्या के समाधान के लिए, पैनल ने सरकारी अस्पतालों में बेड की क्षमता बढ़ाने और महानगरीय केंद्रों में विशेषज्ञ जनशक्ति की भर्ती करने की सिफारिश की है। समिति ने जोर दिया कि यदि सरकारी सुविधाओं में आवश्यक दवाएं और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स उपलब्ध कराए जाएं, तो मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

क्या आप जानते हैं?: भारत के कुछ राज्यों में, निजी अस्पताल में एक बार भर्ती होने का खर्च ग्रामीण परिवार की पूरे साल की आय से अधिक हो सकता है, जिसे 'विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय' कहा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ओडिशा की तुलना में तेलंगाना में इलाज महंगा क्यों है?
तेलंगाना में महंगे निजी स्वास्थ्य केंद्रों पर अधिक निर्भरता और तृतीयक देखभाल केंद्रों (Tertiary Care) की अधिक सघनता इसके मुख्य कारण हैं।

प्रश्न 2: स्वास्थ्य लागत कम करने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?
संसदीय पैनल ने सरकारी अस्पतालों में बेड बढ़ाने, मुफ्त आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्राथमिक-से-तृतीयक रेफरल प्रणाली को बहाल करने का सुझाव दिया है।