राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को अपनी स्वीकृति दे दी है, जिससे अब राज्य का आधिकारिक नाम 'केरलम' हो गया है। यह निर्णय राज्य विधानसभा के प्रस्ताव और संसदीय मंजूरी के बाद लिया गया है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 पर हस्ताक्षर किए।
  • संविधान की पहली अनुसूची में अब राज्य का नाम 'केरलम' के रूप में दर्ज होगा।
  • यह बदलाव 2024 के विधानसभा प्रस्ताव और संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद संभव हुआ।

दक्षिण भारत के प्रशासनिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है, जिससे अब राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलम' हो गया है। यह कदम राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को कानूनी मान्यता देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

इस नाम परिवर्तन की प्रक्रिया 2024 में शुरू हुई थी, जब केरल विधानसभा ने केंद्र सरकार से नाम बदलने के लिए कानून लाने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद, इस विधेयक को लोकसभा और फिर राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित किया गया। यह संशोधन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किया गया है, जो संसद को किसी राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्र में बदलाव करने का अधिकार देता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह नाम परिवर्तन केवल एक भाषाई बदलाव नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय पहचान का एक रणनीतिक दावा है। 'केरलम' शब्द का उपयोग करके राज्य अपनी मूल भाषाई जड़ों की ओर लौट रहा है। हालांकि, इस विधेयक के पारित होने के दौरान राजनीतिक खींचतान भी देखने को मिली। जहाँ भाजपा इसे जनता की जीत बता रही है, वहीं मतदान के समय एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक विभाजन को उजागर किया है।

'केरलम' में परिवर्तन सांस्कृतिक विरासत की प्रतीकात्मक वापसी है, हालांकि सभी सरकारी विभागों में इस बदलाव को लागू करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस निर्णय पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में विशेष अनुरोध किया था। उन्होंने कांग्रेस और सीपीआई(एम) समर्थित मोर्चों की आलोचना करते हुए कहा कि जब राज्य के गौरव का प्रश्न था, तब उनके सांसद सदन से गायब थे।

ऐतिहासिक रूप से, 'केरल' शब्द 'केरा' (नारियल के पेड़) से आया है और मलयालम में '-लम' प्रत्यय का अर्थ 'भूमि' या 'स्थान' होता है। इसलिए, 'केरलम' को भाषाई शुद्धता और ऐतिहासिक सटीकता के करीब माना जा रहा है।

विशेषता पिछली स्थिति नई स्थिति
आधिकारिक नाम केरल केरलम
संवैधानिक आधार पहली अनुसूची संशोधित पहली अनुसूची (अनुच्छेद 3)
विधायी कारण मूल राज्य गठन 2026 नाम परिवर्तन विधेयक
क्या आप जानते हैं?: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने की शक्ति देता है, लेकिन इसके लिए पहले राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य विधानमंडल की राय लेना अनिवार्य है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या इससे राज्य की सीमाओं में कोई बदलाव होगा?
नहीं, यह विधेयक केवल नाम परिवर्तन से संबंधित है; राज्य की सीमाएं यथावत रहेंगी।

प्रश्न 2: यह नाम परिवर्तन कब से प्रभावी होगा?
राष्ट्रपति की मंजूरी और आधिकारिक राजपत्र (Gazette) में अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद यह प्रभावी हो जाएगा।