उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि राज्य गीत को राष्ट्रीय गीतों के बाद गाना कोई अपमान नहीं है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने और नशीली दवाओं से दूर रहने का आह्वान किया।

  • उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि तमिल थाई वळुथु का क्रम राज्य गीत का अपमान नहीं है।
  • उन्होंने राष्ट्र प्रथम की भावना और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया।
  • युवाओं को ड्रग्स से दूर रहने और पुलिस को ड्रग माफिया के खिलाफ सख्त होने की सलाह दी।
  • केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु के 11वें दीक्षांत समारोह में 1,103 स्नातकों को डिग्री प्रदान की गई।

तिरुवरुर के पास नीलाकुडी में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु (CUTN) के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने राज्य गीत 'तमिल थाई वळुथु' के गायन क्रम को लेकर चल रहे विवाद पर बात करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' के बाद इसका गायन किसी भी तरह से राज्य गीत का अपमान नहीं माना जा सकता।

उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में हर चीज का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई अपनी मातृभूमि या अपनी माता का अपमान कर सकता है? उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह हम अपनी माँ और मातृभाषा का सम्मान करते हैं, उसी तरह हमें अपनी मातृभूमि का भी सम्मान करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब पूरे देश में एक समान नियम लागू होते हैं, तो उनका पालन करना आवश्यक है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this statement is a strategic attempt to balance regional linguistic pride with national identity. In a state like Tamil Nadu, where linguistic identity is deeply intertwined with politics, the Vice-President's emphasis on 'Nation First' serves as a reminder of the overarching national fabric that binds diverse regional identities together.

इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि 'वंदे मातरम' वह शब्द था जिसने देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने याद दिलाया कि तमिलनाडु में भी वी.ओ. चिदंबरम पिल्लई और सुब्रमण्य शिवा जैसे महान नेताओं ने गांवों में घूम-घूमकर 'वंदे मातरम' के नारे के साथ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

"राष्ट्रवाद और क्षेत्रीय गौरव एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक होने चाहिए ताकि देश की अखंडता बनी रहे।"

शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर बात करते हुए, उपराष्ट्रपति ने छात्रों को नशीली दवाओं (ड्रग्स) के जाल से बचने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की कि वे ड्रग माफिया के खिलाफ 'बेरहमी' से कार्रवाई करें ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि युवाओं के मन पर उनका अपना नियंत्रण होना चाहिए, न कि किसी नशीले पदार्थ का।

इस समारोह में कुल 1,103 स्नातकों को उनकी डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 50 स्वर्ण पदक विजेता शामिल थे। उल्लेखनीय है कि कुल स्नातकों में से 616 महिलाएं थीं और स्वर्ण पदक विजेताओं में 37 महिलाएं थीं, जो उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। इस अवसर पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

क्या आप जानते हैं?: तमिल थाई वळुथु तमिलनाडु का आधिकारिक राज्य गीत है, जो तमिल भाषा और संस्कृति के गौरव का प्रतीक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उपराष्ट्रपति ने तमिल थाई वळुथु के बारे में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि इसे वंदे मातरम और जन गण मन के बाद गाना अपमान नहीं है, बल्कि हमें राष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहिए।

प्रश्न 2: दीक्षांत समारोह में कितने छात्रों को डिग्री मिली?
उत्तर: कुल 1,103 स्नातकों को डिग्रियां मिलीं, जिनमें 50 स्वर्ण पदक विजेता शामिल थे।