मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु में 'प्रेजेंस-लेस रजिस्ट्रेशन' प्रणाली की शुरुआत की है, जिससे नागरिक अब रजिस्ट्रार कार्यालय जाए बिना संपत्ति का पंजीकरण करा सकेंगे। यह पहल पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए आधार सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग करती है।
- प्रेजेंस-लेस रजिस्ट्रेशन से अब रजिस्ट्रार कार्यालय जाए बिना संपत्ति पंजीकरण संभव होगा।
- खरीदार, विक्रेता और गवाहों के लिए आधार-आधारित सत्यापन अनिवार्य है।
- धोखाधड़ी रोकने के लिए डिजिटल दस्तावेजों में डायनेमिक कलर-कोडिंग और QR कोड का उपयोग किया गया है।
- रजिस्ट्रार को 24 घंटे के भीतर आवेदन पर कार्रवाई करनी होगी।
शासन के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार, 17 अगस्त, 2026 को 'प्रेजेंस-लेस रजिस्ट्रेशन' (उपस्थिति-रहित पंजीकरण) प्रणाली का शुभारंभ किया। यह नई प्रणाली विशेष रूप से हाउसिंग प्लॉट और बहुमंजिला इमारतों के अपार्टमेंट के पंजीकरण पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य उन नौकरशाही बाधाओं और लंबी कतारों को समाप्त करना है जो पारंपरिक रूप से रजिस्ट्रार कार्यालयों से जुड़ी होती हैं।
यह पहल पहले से लागू 'एनीवेयर रजिस्ट्रेशन' मॉडल का विस्तार है। जहाँ पिछला मॉडल उपयोगकर्ताओं को अपना कार्यालय चुनने की अनुमति देता था, वहीं 'प्रेजेंस-लेस' मॉडल ने शारीरिक उपस्थिति की आवश्यकता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित लॉगिन आईडी बनानी होगी, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे और विक्रेता, खरीदार एवं गवाहों के आधार कार्ड जमा करने होंगे, जिनका डिजिटल सत्यापन किया जाएगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल सुविधा के बारे में नहीं है, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक देरी के खिलाफ एक रणनीतिक प्रहार है। सत्यापन प्रक्रिया को स्वचालित करके और रजिस्ट्रारों के लिए 24 घंटे की सख्त समय सीमा तय करके, सरकार बिचौलियों के प्रभाव को कम कर रही है।
डायनेमिक कलर-कोडिंग और QR-आधारित सत्यापन का एकीकरण एक साधारण कानूनी दस्तावेज को एक सुरक्षित और ट्रैक करने योग्य डिजिटल संपत्ति में बदल देता है।
जालसाजी के जोखिम से निपटने के लिए, सरकार ने एक परिष्कृत सुरक्षा परत लागू की है। डिजिटल कॉपी पर पृष्ठांकन (Endorsement) 'डायनेमिक रैंडम फाइव कलर्स' में होगा, जो हर लेनदेन के साथ बदलता रहेगा। इसके अलावा, दस्तावेज के प्रत्येक पृष्ठ पर एक विशिष्ट QR कोड होगा जिसमें पंजीकरण की तारीख और दस्तावेज की प्रकृति का विवरण होगा। यदि भौतिक प्रति और डिजिटल मास्टर के बीच कोई विसंगति पाई जाती है, तो डिजिटल संस्करण में 'X' प्रतीक द्वारा उसे दर्शाया जाएगा।
कार्यप्रवाह को सरल बनाया गया है: एक बार दस्तावेज जमा हो जाने के बाद, रजिस्ट्रार को 24 घंटे के भीतर उन्हें स्वीकृत, अस्वीकृत या सुधार के लिए भेजना होगा। यदि सुधार की आवश्यकता है, तो आवेदक के पास पुन: जमा करने के लिए 30 दिनों का समय होगा। अंतिम स्वीकृति के बाद, रजिस्ट्रार डिजिटल हस्ताक्षर करेगा, जिससे दस्तावेज तुरंत लाभार्थी के पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगा। प्रमाणित भौतिक प्रतियां 60 दिनों के बाद प्राप्त की जा सकती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
तमिलनाडु भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण में अग्रणी रहा है। पंजीकरण विभागों के कंप्यूटरीकरण से लेकर 'एनीवेयर रजिस्ट्रेशन' योजना तक, राज्य ने लगातार नागरिकों और सरकार के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास किया है। यह नवीनतम कदम 'डिजिटल इंडिया' के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि संपत्ति के अधिकार एक अटूट डिजिटल ट्रेल के माध्यम से सुरक्षित रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: इस प्रणाली के तहत संपत्ति का पंजीकरण होने में कितना समय लगता है?
रजिस्ट्रार के लिए यह अनिवार्य है कि वह आवेदन जमा होने के 24 घंटे के भीतर दस्तावेजों पर कार्रवाई करे।
प्रश्न 2: यदि मेरे दस्तावेज खारिज हो जाते हैं या उनमें सुधार की आवश्यकता होती है तो क्या होगा?
रजिस्ट्रार आपको पोर्टल के माध्यम से सूचित करेगा, और आपके पास आवश्यक सुधार करने और दस्तावेजों को पुन: जमा करने के लिए 30 दिन का समय होगा।