अनंतपुर जिले में हंद्री-नीवा मुख्य नहर पानी से लबालब है, लेकिन प्रशासनिक प्रतिबंधों के कारण किसान अपनी फसलों को पानी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे लाखों का निवेश खतरे में है।
- हंद्री-नीवा नहर में पर्याप्त पानी होने के बावजूद किसानों को सिंचाई की अनुमति नहीं।
- लगभग 50,000 एकड़ में मिर्च की खेती और नर्सरी निवेश जोखिम में।
- प्रशासन का तर्क है कि पानी को प्राथमिकता के आधार पर पीने के पानी के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है।
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के उरवकोंडा मंडल में एक विडंबनापूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। जहाँ एक ओर हंद्री-नीवा मुख्य नहर पानी से पूरी तरह भरी हुई है, वहीं दूसरी ओर नहर के ठीक बगल में स्थित खेत सूखे की चपेट में हैं। किसान अपनी आँखों के सामने पानी बहते देख रहे हैं, लेकिन वे इसे अपनी फसलों तक पहुँचाने में असमर्थ हैं।
स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि वे नहर से पानी खींचने के लिए मोटर पंप लगाने को तैयार हैं, लेकिन अधिकारियों ने इन पंपों के लिए आवश्यक थ्री-फेज बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। इस प्रशासनिक बाधा के कारण फसलें सूख रही हैं और किसानों में भारी आक्रोश है।
मिर्च की खेती पर संकट
जिले में इस सीजन में लगभग 50,000 एकड़ भूमि पर मिर्च की खेती के लिए तैयारी की गई थी। किसानों ने बीज, उर्वरक और कीटनाशकों पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। नर्सरियों में तैयार लाखों पौधे अब पानी के अभाव में नष्ट हो रहे हैं। अकेले वज्रकरूर मंडल के आसपास 5,000 एकड़ में फसल बोई गई थी, जहाँ प्रति एकड़ 20,000 से 30,000 रुपये का निवेश किया गया था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this crisis highlights a critical conflict between immediate agricultural needs and long-term water security. While the government prioritizes drinking water for future droughts, the immediate loss of crop investment can push thousands of small-scale farmers into a debt trap, potentially triggering a socio-economic crisis in the region.
कृषि और पेयजल प्रबंधन के बीच संतुलन न बना पाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
किसानों ने कर्नाटक के एचएलसी (HLC) मॉडल का उदाहरण देते हुए मांग की है कि कम अवधि की फसलों के लिए पानी जारी किया जाए, जैसा कि पड़ोसी राज्य में किया जाता है।
दूसरी ओर, एचएनएसएसई (HNSSSE) के राजगोपाल ने स्पष्ट किया कि अगले वर्ष 'सुपर एल नीनो' के प्रभाव के कारण पानी की भारी कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान लक्ष्य मुख्य नहर के माध्यम से पेयजल स्रोतों को भरना है और बीच में मोटर पंपों के उपयोग से जल प्रवाह कम हो सकता है, जिससे पेयजल आपूर्ति प्रभावित होगी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: किसान पानी क्यों नहीं निकाल पा रहे हैं?
उत्तर: अधिकारियों ने मोटर पंपों के लिए बिजली आपूर्ति बंद कर दी है ताकि पानी का प्रवाह कम न हो और पेयजल स्रोतों को प्राथमिकता मिले।
प्रश्न 2: कितने क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई हैं?
उत्तर: लगभग 50,000 एकड़ में मिर्च की खेती और नर्सरी प्रभावित होने की आशंका है।