केंद्र सरकार ने शहरी स्वच्छता में सुधार के लिए सिंगापुर मॉडल पर आधारित 'नाइट सॉइल' संग्रह पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की सलाह दी है। सिवरामन समिति की सिफारिशों के बाद यह कदम उठाया गया है ताकि सीवरेज सिस्टम की कमी को दूर किया जा सके।
- केंद्र सरकार ने राज्यों को सिंगापुर मॉडल पर नाइट सॉइल सेवा शुरू करने का सुझाव दिया है।
- देश के केवल 3,000 में से 200 शहरी केंद्रों में ही सीवरेज की सुविधा उपलब्ध है।
- सिवरामन समिति ने शहरी स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नए दिशा-निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर को ऊपर उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र ने राज्य सरकारों को सलाह दी है कि वे चुनिंदा शहरों में सिंगापुर मॉडल पर आधारित 'नाइट सॉइल' (मानव अपशिष्ट) संग्रह सेवा के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करें।
यह निर्णय कार्य और आवास मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेष समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। इस समिति को शहरी कचरे पर सिवरामन समिति की रिपोर्ट की जांच करने का काम सौंपा गया था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत के तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण वर्तमान सीवरेज प्रणाली पर्याप्त नहीं है।
शहरी बुनियादी ढांचे की वर्तमान स्थिति
आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश के लगभग 3,000 शहरी केंद्रों में से वर्तमान में केवल 200 केंद्रों में ही सीवरेज की सुविधा है। यहां तक कि इन 200 केंद्रों में भी, अधिकांश स्थानों पर केवल आंशिक सीवरेज प्रणाली ही उपलब्ध है। इसका परिणाम यह है कि शहरी आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी सीवर नेटवर्क की पहुंच से बाहर है।
सिवरामन समिति ने निष्कर्ष निकाला है कि शहरों के तेजी से विस्तार के कारण सीवरेज नेटवर्क का विस्तार उतनी तेजी से नहीं हो पाया है। इसलिए, आने वाले कुछ समय तक नाइट-सॉइल संग्रह की आवश्यकता बनी रहेगी। मुख्य चुनौती यह है कि इस संग्रह को इस तरह से व्यवस्थित किया जाए कि इससे शहर की स्वच्छता में सुधार हो, न कि गंदगी बढ़े।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के शहरी नियोजन में सीवरेज बुनियादी ढांचे की कमी एक गंभीर संकट है। यदि कचरे और मानव अपशिष्ट को एक साथ डंप किया जाता है, जैसा कि वर्तमान में कई स्थानों पर देखा जा रहा है, तो यह अत्यधिक अस्वास्थ्यकर स्थिति पैदा करता है। सिंगापुर मॉडल को अपनाना एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।
शहरी स्वच्छता केवल पाइप बिछाने के बारे में नहीं है, बल्कि अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन और संग्रह के बारे में है।
समिति ने पाया है कि कई क्षेत्रों में कचरे (refuse) और नाइट सॉइल को एक साथ फेंक दिया जाता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है। सिंगापुर की तर्ज पर एक अलग और व्यवस्थित संग्रह प्रणाली इस समस्या का समाधान कर सकती है।
Frequently Asked Questions
1. नाइट सॉइल संग्रह क्या है?
यह मानव अपशिष्ट (human waste) को व्यवस्थित तरीके से एकत्र करने की प्रक्रिया है, जो उन क्षेत्रों में आवश्यक है जहाँ सीवरेज लाइनें उपलब्ध नहीं हैं।
2. सिंगापुर मॉडल क्यों महत्वपूर्ण है?
सिंगापुर का मॉडल कचरा प्रबंधन में स्वच्छता और दक्षता का वैश्विक मानक माना जाता है, जो भारत के शहरी संकट के लिए एक समाधान हो सकता है।