मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरुलिया में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार उद्योगों के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण नहीं करेगी, बल्कि लैंड पर्चेज और लैंड पूलिंग जैसी पारदर्शी नीतियों को अपनाएगी।
- सरकार उद्योगों के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण (Forced Acquisition) नहीं करेगी।
- लैंड पर्चेज और लैंड पूलिंग पॉलिसी के माध्यम से जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
- 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए अब केंद्रीय स्तर पर अनुमति मिलेगी।
- पूर्ववर्ती वामपंथी और टीएमसी सरकारों की औद्योगिक नीतियों की आलोचना।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरुलिया में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान राज्य की औद्योगिक दिशा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उद्योग मंत्री तापस राय की उपस्थिति में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार कारखानों या औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए किसी भी परिस्थिति में जबरन भूमि अधिग्रहण का सहारा नहीं लेगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य ने 34 वर्षों के वामपंथी शासन के दौरान देखा कि कैसे बंदूक की नोक पर जमीन ली गई, जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए अत्यंत चिंताजनक और गलत परंपरा थी। वहीं, पिछले 15 वर्षों के टीएमसी शासन की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने औद्योगिक समूहों को यह कहकर निराश किया कि वह जमीन उपलब्ध नहीं करा सकती।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this shift from 'forced acquisition' to 'land pooling' is a strategic move to regain the trust of the farming community while attracting global investors. By decoupling land procurement from state coercion, the government aims to eliminate the violent land conflicts that historically plagued the region (such as Singur and Nandigram).
"The transition to a Land Purchase and Pooling model signals a shift toward a market-driven industrialization strategy that prioritizes farmer consent over administrative mandates."
मुख्यमंत्री ने पुरुलिया के रघुनाथपुर में एक निजी स्टील प्लांट की आधारशिला रखी और कहा कि वे 'ताला बंद' की राजनीति और उग्र ट्रेड यूनियन संस्कृति को समाप्त करना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक स्थिति में सुधार और युवाओं को रोजगार देने के लिए औद्योगिक विकास अनिवार्य है।
निवेशकों के लिए रेड टेप को कम करते हुए, उन्होंने घोषणा की कि यदि कोई निवेशक 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करना चाहता है, तो उसे अब नगर पालिका या जिला परिषद के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी; इसके बजाय, केंद्रीय स्तर पर मंजूरी प्रदान की जाएगी।
| शासन/नीति | भूमि दृष्टिकोण | परिणाम |
|---|---|---|
| वामपंथी शासन (34 वर्ष) | जबरन अधिग्रहण | जन आक्रोश और हिंसा |
| TMC शासन (15 वर्ष) | अधिग्रहण में अनिच्छा | औद्योगिक ठहराव |
| वर्तमान सरकार | लैंड पूलिंग/पर्चेज | पारदर्शी और सहमति-आधारित |
Frequently Asked Questions
1. लैंड पूलिंग पॉलिसी क्या है?
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसान अपनी जमीन सरकार को देते हैं, और विकास के बाद उन्हें विकसित जमीन का एक हिस्सा वापस मिलता है या लाभ में हिस्सेदारी मिलती है।
2. बड़े निवेशकों के लिए क्या सुविधा दी गई है?
100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के लिए अब स्थानीय निकायों के बजाय सीधे केंद्रीय स्तर पर अनुमति मिलने का प्रावधान है।