दिल्ली मास्टर प्लान 2047 राजधानी की गतिशीलता को बदलने के लिए गैर-मोटर चालित परिवहन और समर्पित पैदल यात्री क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहा है। 'चलने के अधिकार' पर केंद्रित यह योजना शहरी बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार का लक्ष्य रखती है।
- दिल्ली मास्टर प्लान 2047 सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 'चलने के अधिकार' (Right to Walk) पर जोर देता है।
- कुल यात्राओं में पैदल चलना, साइकिल चलाना और रिक्शा जैसे गैर-मोटर चालित साधन 42% हिस्सा रखते हैं।
- DDA ने पैदल बुनियादी ढांचे के लिए 24 प्राथमिकता वाले क्षेत्र और 14 तत्काल प्रस्ताव चिह्नित किए हैं।
- योजना में फुटपाथों से अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए 'मल्टी-यूटिलिटी जोन' बनाने का प्रावधान है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के माध्यम से एक दूरदर्शी दृष्टिकोण पेश किया है, जो शहर के बुनियादी ढांचे को वाहनों के बजाय मनुष्यों के अनुकूल बनाने की कोशिश है। इस परिवर्तन के केंद्र में "चलने का अधिकार" है, जिसे हाल ही में न्यायिक टिप्पणियों के बाद कानूनी मजबूती मिली है। इस योजना का उद्देश्य सुरक्षित, छायादार और सार्वभौमिक रूप से सुलभ रास्तों का एक शहरव्यापी नेटवर्क बनाना है, जो सार्वजनिक परिवहन के साथ सहजता से जुड़ा हो।
वर्तमान आंकड़े एक चौंकाने वाली वास्तविकता दिखाते हैं: एक औसत दिल्लीवासी प्रतिदिन केवल 1.6 किमी चलता है, जबकि साइकिल चलाने का औसत 3.6 किमी है। इसके बावजूद, शहर की कुल यात्राओं में गैर-मोटर चालित साधनों की हिस्सेदारी 42% है, जिनमें से अधिकांश यात्राएं 5 किमी से कम दूरी की होती हैं। इनमें पैदल चलने वालों की हिस्सेदारी 35% है, जो बुनियादी ढांचे में सुधार की भारी संभावना को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम की समस्या को केवल नए फ्लाईओवर बनाकर हल नहीं किया जा सकता। "चलने के अधिकार" को संस्थागत बनाकर, DDA 'एक्टिव ट्रैवल' (सक्रिय यात्रा) को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। यह बदलाव सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे शहर एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ेगा जहां अंतिम मील की कनेक्टिविटी इंजनों के बजाय पैरों और पैडल से पूरी हो।
इसे लागू करने के लिए, DDA ने 14 विशिष्ट प्रस्ताव तैयार किए हैं जो वर्तमान में संबंधित सड़क एजेंसियों के पास हैं। इनमें स्कूलों और बाजारों के पास पेलिकन क्रॉसिंग (पैदल यात्री-संचालित लाइट कंट्रोल) लगाना शामिल है। इसके अलावा, योजना में मल्टी-यूटिलिटी जोन (MUZ) की शुरुआत की गई है, जहां बैठने की जगह, कूड़ेदान, सार्वजनिक शौचालय और पीने के पानी जैसी सुविधाएं होंगी, ताकि पैदल चलना केवल मजबूरी नहीं बल्कि एक आरामदायक अनुभव बने।
व्यावसायिक और विरासत क्षेत्रों में केवल पैदल यात्री जोन बनाने से स्थानीय विक्रेताओं के लिए फुटफॉल बढ़ेगा और दिल्ली के आर्थिक भूगोल की परिभाषा बदल जाएगी।
बुनियादी ढांचे के इस सुधार में फुटपाथों से अवैध अतिक्रमण और अनधिकृत संरचनाओं को हटाना भी शामिल है। योजना के तहत 30 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर 'एक्टिव-ट्रैवल कॉरिडोर' बनाने की envisioning की गई है, जो सांस्कृतिक केंद्रों और यमुना रिवरफ्रंट जैसे प्राकृतिक स्थलों को जोड़ेंगे। लैंड-पूलिंग और ट्रांजिट-ओरिएंटेड विकास को शुरू से ही "एक्टिव ट्रैवल एरिया" माना जाएगा।
| परिवहन का साधन | यात्रा हिस्सेदारी (%) | इष्टतम दूरी |
|---|---|---|
| पैदल यात्री | 35% | < 5 किमी |
| सार्वजनिक परिवहन (मेट्रो/बस) | 24% | 10.9 किमी - 16.7 किमी |
| साइकिल रिक्शा | 7% | < 5 किमी |
| निजी वाहन (कार/बाइक) | परिवर्तनीय | 8 - 14 किमी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: मल्टी-यूटिलिटी जोन (MUZ) क्या हैं?
MUZ फुटपाथों पर निर्धारित क्षेत्र हैं जहां बैठने की व्यवस्था, साइनबोर्ड, सार्वजनिक शौचालय और वेंडर्स को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि पैदल चलने वालों का रास्ता बाधित न हो।
प्रश्न 2: लंबी दूरी की यात्राओं को इस योजना में कैसे संभाला जाएगा?
लंबी दूरी की यात्रा (औसत 16.7 किमी) के लिए दिल्ली मेट्रो पर निर्भरता बनी रहेगी, लेकिन इसे साइकिल पार्किंग और पिक-अप/ड्रॉप-ऑफ सुविधाओं के साथ जोड़ा जाएगा ताकि 'राइट टू वॉक' को बढ़ावा मिले।