रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए जनरल एटॉमिक्स के साथ 1,943 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर ISR कवरेज सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
- भारत ने 1,943 करोड़ रुपये में दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन लीज पर लिए हैं।
- यह लीज 30 महीने की अवधि के लिए है, जो 2029 में स्थायी खरीद शुरू होने तक प्रभावी रहेगी।
- इन ड्रोन्स का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाना है।
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी रक्षा कंपनी जनरल एटॉमिक्स के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है, जिसके तहत भारतीय नौसेना 30 महीनों के लिए दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन का उपयोग करेगी। यह सौदा कुल 1,943 करोड़ रुपये का है और इसका प्राथमिक उद्देश्य हिंद महासागर में भारत की दीर्घकालिक निगरानी क्षमताओं को बनाए रखना है।
लीज मॉडल का रणनीतिक महत्व
सैन्य उपकरणों के मामले में लीजिंग असामान्य लग सकती है, लेकिन भारत के लिए यह एक त्वरित समाधान है। भारत ने अक्टूबर 2024 में कुल 31 MQ-9B ड्रोन (15 सी गार्डियन और 16 स्काई गार्डियन) खरीदने का निर्णय लिया था, लेकिन इनकी डिलीवरी 2029 से शुरू होनी तय है। नौकरशाही की जटिलताओं और लंबी खरीद प्रक्रिया के बीच, लीजिंग एक ऐसा रास्ता है जिससे तत्काल सैन्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
क्यों चुना गया लीज विकल्प?
यह व्यवस्था ठीक वैसी ही है जैसे कोई व्यक्ति अपना घर खरीदने के लिए बचत करते समय किराए के घर में रहता है। 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद चीन के साथ बढ़ते तनाव के दौरान भी भारत ने इसी मॉडल का उपयोग किया था। इसके अलावा, लीजिंग का एक बड़ा फायदा यह है कि रखरखाव और तकनीकी खराबी की जिम्मेदारी आपूर्तिकर्ता की होती है। उदाहरण के लिए, सितंबर 2024 में एक ड्रोन के तकनीकी रूप से विफल होने पर जनरल एटॉमिक्स ने बिना किसी अतिरिक्त लागत के रिप्लेसमेंट प्रदान किया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल तकनीकी आवश्यकता नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक अनिवार्यता है। 'ऑपरेशन सिंदूर' और अमेरिका-ईरान युद्ध की अनिश्चितताओं के बीच, हिंद महासागर में शिपिंग लेन और चोक पॉइंट्स की निगरानी करना भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह लीज सुनिश्चित करती है कि 2029 तक भारत की 'आंखें' बंद न हों।
MQ-9B ड्रोन का उपयोग भारत को समुद्र के भीतर पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने की दुर्लभ क्षमता प्रदान करता है, जो क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए आवश्यक है।
तकनीकी रूप से, सी गार्डियन ड्रोन 30 घंटे से अधिक समय तक बिना रुके उड़ान भर सकते हैं। ये ड्रोन नागरिक विमानन के साथ एकीकृत हो सकते हैं, जिससे इन्हें सामान्य हवाई अड्डों से संचालित करना संभव होता है।
| विशेषता | सी गार्डियन (Sea Guardian) | स्काई गार्डियन (Sky Guardian) |
|---|---|---|
| प्राथमिक उपयोग | समुद्री निगरानी और पनडुब्बी ट्रैकिंग | थल और वायु निगरानी |
| उपयोगकर्ता | भारतीय नौसेना | भारतीय सेना और वायुसेना |
| मुख्य क्षमता | लंबी दूरी का समुद्री ISR | रणनीतिक खुफिया जानकारी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत ने ड्रोन खरीदने के बजाय लीज पर क्यों लिए?
क्योंकि स्थायी खरीद की डिलीवरी 2029 तक शुरू होगी, और तत्काल सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए लीजिंग सबसे तेज़ तरीका है।
2. MQ-9B ड्रोन की मुख्य खासियत क्या है?
यह 30 घंटे से अधिक उड़ान भर सकता है और इसमें उन्नत सेंसर और रडार लगे हैं जो पनडुब्बियों का पता लगा सकते हैं।