दिल्ली के मास्टर प्लान 2047 के तहत झुग्गी पुनर्वास (Slum Rehab) के ढांचे में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे निजी डेवलपर्स को अधिक लाभ मिलेगा। नए नियमों के अनुसार, डेवलपर्स अब झुग्गी वाली जमीन पर ऊंची इमारतें बना सकेंगे और अधिक हिस्से को मुनाफे के लिए बेच सकेंगे।

  • मास्टर प्लान 2047 के तहत झुग्गी पुनर्वास के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) बढ़ाकर 500 कर दिया गया है।
  • निजी डेवलपर्स अब झुग्गी की भूमि का 60% हिस्सा व्यावसायिक लाभ के लिए बेच सकेंगे।
  • DUSIB अधिनियम में संशोधन के बाद, 1 जनवरी 2025 से पहले रहने वाले सभी झुग्गी निवासी अब फ्लैट के पात्र होंगे।

दिल्ली के शहरी परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार मास्टर प्लान 2047 (MPD-2047) के तहत झुग्गी पुनर्वास (Slum Rehabilitation) के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव प्रस्तावित हैं। इस नए ढांचे का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अधिक आकर्षक बनाना है, ताकि वर्षों से अटके हुए पुनर्वास प्रोजेक्ट्स को गति दी जा सके।

वर्तमान में, दिल्ली में पुनर्वास प्रक्रिया काफी धीमी रही है। अब तक केवल अशोक विहार और कालकाजी जैसे दो इन-सीटू (On-site) प्रोजेक्ट ही पूरे हो पाए हैं। इस देरी का मुख्य कारण निजी डेवलपर्स की अरुचि रही है। नए प्रस्ताव के तहत, डेवलपर्स को अब झुग्गी वाली जमीन पर ऊंची इमारतें बनाने और अधिक भूमि को व्यावसायिक रूप से बेचने की अनुमति दी जाएगी।

बदलाव का गणित: क्या होगा नया समीकरण?

नए मास्टर प्लान में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को बढ़ाकर 500 कर दिया गया है, जो पहले 400 था। इसका मतलब है कि अब जमीन पर अधिक सघन निर्माण और ऊंची इमारतें संभव होंगी। इसके अलावा, व्यावसायिक बिक्री के लिए उपलब्ध भूमि का हिस्सा 40% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है, जबकि पुनर्वास के लिए आरक्षित भूमि को घटाकर 40% कर दिया गया है।

विशेषता पुराना प्रावधान (MPD-2021/41) नया प्रस्ताव (MPD-2047)
फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) 400 (आवासीय) / 300 (व्यावसायिक) 500 (दोनों के लिए)
व्यावसायिक बिक्री हेतु भूमि 40% 60%
पुनर्वास हेतु आरक्षित भूमि 60% 40%

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली की बेशकीमती जमीन पर स्थित झुग्गियों का पुनर्वास करना एक बड़ी चुनौती रही है। छोटे भूखंड, रेलवे ट्रैक या नालों के पास स्थित होने के कारण डेवलपर्स निवेश करने से कतराते थे। उच्च FAR और अधिक व्यावसायिक लाभ की संभावना से निजी क्षेत्र का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।

"डेवलपर्स को अधिक निर्माण की अनुमति देकर, हम उम्मीद करते हैं कि वे पुनर्वास परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेंगे, बिना झुग्गी निवासियों के हितों से समझौता किए।" - DDA अधिकारी

इसके अतिरिक्त, दिल्ली विधानसभा ने DUSIB अधिनियम में संशोधन किया है, जिससे पात्रता की कट-ऑफ तिथि को 10 साल बढ़ा दिया गया है। अब 1 जनवरी 2025 से पहले के निवासी भी फ्लैट के हकदार होंगे। केंद्र सरकार ने भी इस दिशा में कड़े निर्देश दिए हैं, जहां गृह मंत्री अमित शाह ने 45 दिनों के भीतर पांच JJ क्लस्टरों के लिए टेंडर जारी करने का आदेश दिया है।

Did You Know?: दिल्ली में लगभग 750 झुग्गी बस्तियां हैं, जिनमें से आधी रेलवे और DDA जैसी केंद्र सरकार की एजेंसियों के स्वामित्व वाली भूमि पर स्थित हैं।

Frequently Asked Questions

1. नए मास्टर प्लान से झुग्गी निवासियों को क्या फायदा होगा?
अब अधिक निवासी फ्लैट के पात्र होंगे और उन्हें उसी स्थान पर बेहतर जीवन स्तर वाले घर मिलने की संभावना बढ़ेगी।

2. डेवलपर्स को इससे क्या लाभ है?
अधिक FAR और 60% भूमि को व्यावसायिक रूप से बेचने की अनुमति मिलने से उनका मुनाफा बढ़ेगा।