झारखंड परीक्षा घोटाले के केंद्र में रही टेस्टिंग फर्म TDPL का लखनऊ कार्यालय पुलिस ने सील कर दिया है। उत्तर प्रदेश में भी इस कंपनी पर वीवीआईपी रिश्तेदारों को नौकरी देने और अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं।

  • झारखंड पुलिस ने लखनऊ में TDPL का कार्यालय सील किया और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।
  • TDPL पर उत्तर प्रदेश विधानमंडल सचिवालय में भर्ती के दौरान 'भाई-भतीजावाद' का आरोप है।
  • कंपनी के निदेशकों राम बीर सिंह और सत्य पाल सिंह पर धोखाधड़ी और अनियमितता के मामले दर्ज हैं।

झारखंड सरकार द्वारा राज्य चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय के पीछे जिस टेस्टिंग फर्म का नाम प्रमुखता से आ रहा है, वह अब गहरे संकट में है। TSR Data Processing Private Limited (TDPL), जो परीक्षाओं के संचालन के लिए जिम्मेदार थी, अब न केवल झारखंड बल्कि उत्तर प्रदेश में भी बड़े कानूनी विवादों और अनियमितताओं के घेरे में है।

हाल ही में, झारखंड पुलिस की सीआईडी (CID) ने संदिग्ध अनियमितताओं की जांच के दौरान लखनऊ स्थित TDPL के मुख्य कार्यालय पर छापा मारा। स्थानीय पुलिस की सहायता से झारखंड पुलिस ने कार्यालय को सील कर दिया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। कंपनी के निदेशक राम बीर सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दूसरे निदेशक सत्य पाल सिंह फिलहाल लापता बताए जा रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में निजी फर्मों की भूमिका कितनी संवेदनशील है। यदि एक टेस्टिंग एजेंसी ही निष्पक्षता के बजाय 'भाई-भतीजावाद' को बढ़ावा देने लगे, तो यह लाखों युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक संस्थानों की अखंडता के साथ खिलवाड़ है।

उत्तर प्रदेश के मामले में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने TDPL से जुड़ी अनियमितताओं को "चौंकाने वाला" करार दिया था। जांच में पाया गया कि 2021-22 में यूपी विधानसभा और विधान परिषद के सचिवालय में 186 प्रशासनिक पदों के लिए आयोजित परीक्षाओं में भारी धांधली हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 20% नौकरियां वीवीआईपी और उन अधिकारियों के रिश्तेदारों को दी गईं, जिनकी देखरेख में परीक्षा संपन्न हुई थी। इसमें TDPL के निदेशकों के पांच रिश्तेदार भी शामिल थे।

भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव न केवल भ्रष्टाचार को जन्म देता है, बल्कि योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन करता है।

कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड भी चौंकाने वाले हैं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के अनुसार, TDPL का राजस्व 2023-24 में 5.23 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 19.62 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने अपने सभी 965 कर्मचारियों को 'पुरुष' घोषित किया है, जो कॉर्पोरेट संरचना पर सवाल खड़े करता है।

Did You Know?: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में पारदर्शिता की कमी के कारण सीबीआई जांच की मांग की थी, जिसमें परिणामों और उम्मीदवारों की सूची को सार्वजनिक न करने पर सवाल उठाए गए थे।

Frequently Asked Questions

1. TDPL पर मुख्य आरोप क्या हैं?
TDPL पर परीक्षाओं में धांधली, वीवीआईपी रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप हैं।

2. वर्तमान में कंपनी की स्थिति क्या है?
झारखंड पुलिस ने लखनऊ में कंपनी का कार्यालय सील कर दिया है और इसके प्रमुख निदेशकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।