सुप्रीम कोर्ट के 9‑जज बेंच ने बेंगलुरु जल आपूर्ति विवाद में ‘उद्योग’ की नई परिभाषा दी, जो अब सभी लंबित मामलों में लागू होगी। यह निर्णय 2020 के औद्योगिक संबंध कोड के आधार पर त्रिपल‑टेस्ट को संशोधित करता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने ‘उद्योग’ की परिभाषा को औद्योगिक संबंध कोड, 2020 के अनुसार मान्य किया।
  • बेंगलुरु जल आपूर्ति मामले में यह नई परिभाषा लागू होगी और सभी लंबित मामलों को प्रभावित करेगी।
  • त्रिपल‑टेस्ट (1978) को संशोधित कर न्यायिक सिद्धांत में बड़ा बदलाव आया है।

मामले की पृष्ठभूमि

बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं स्वच्छता बोर्ड (BWSSB) के खिलाफ कई श्रमिक संघों ने ‘उद्योग’ की परिभाषा को लेकर चुनौती दी थी, जिससे 1978 के त्रिपल‑टेस्ट का प्रयोग हो रहा था। यह परीक्षण यह तय करता था कि कोई कार्यस्थल उद्योग माना जाएगा या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

9‑जज बेंच ने औद्योगिक संबंध कोड, 2020 की धारा 2(1) के आधार पर ‘उद्योग’ को परिभाषित किया, जिसमें किसी भी आर्थिक गतिविधि को शामिल किया गया है जो नियमित आय उत्पन्न करती है। इस नई परिभाषा ने 1978 के परीक्षण को प्रभावी रूप से निरस्त कर दिया।

न्यायिक प्रभाव

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस परिभाषा को सभी लंबित श्रम मामलों में लागू किया जाएगा, जिससे कई विवादों में तेज़ी से निपटारा संभव होगा। यह निर्णय न केवल बेंगलुरु में, बल्कि पूरे भारत में श्रम न्याय प्रणाली को पुनः आकार देगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this ruling streamlines industrial dispute resolution, reduces litigation costs, and aligns Indian labour law with contemporary economic realities, potentially attracting more investment.

"यह निर्णय भारतीय श्रम कानून में एक मील का पत्थर है, जो उद्योगों को स्पष्ट कानूनी ढांचा प्रदान करता है," कहा श्रम कानून विशेषज्ञ प्रो. अजय सिंह ने।
Did You Know?: 1978 का त्रिपल‑टेस्ट पहली बार 1970 के दशक में भारत में औद्योगिक विवादों को सुलझाने के लिए पेश किया गया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह नई परिभाषा सभी मौजूदा श्रम अनुबंधों पर retroactive लागू होगी?

उत्तर: कोर्ट ने कहा है कि यह वर्तमान और भविष्य के मामलों दोनों पर लागू होगी, लेकिन मौजूदा अनुबंधों में परिवर्तन के लिए पक्षों की सहमति आवश्यक होगी।

प्रश्न 2: छोटे उद्यमों को इस नई परिभाषा से क्या लाभ होगा?

उत्तर: छोटे उद्यम अब स्पष्ट रूप से ‘उद्योग’ के तहत आएंगे, जिससे उन्हें श्रम संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा लाभों का अधिकार मिलेगा।