सोशल मीडिया ट्रेंड्स और रोमांच की चाह में युवा खतरनाक जंगलों और अनजान रास्तों पर कदम रख रहे हैं, जिससे न केवल उनकी जान जोखिम में है बल्कि प्रशासन पर भी भारी बोझ बढ़ रहा है।

  • सोशल मीडिया के प्रभाव में युवा बिना तैयारी के खतरनाक जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर जा रहे हैं।
  • अवैध प्रवेश के कारण वन विभाग को महंगे और जोखिम भरे बचाव अभियान चलाने पड़ रहे हैं।
  • केरल वन अधिनियम, 1961 के तहत वन क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है।

हाल ही में कोझिकोड के पास वालूक गांव में एक घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी। कुछ युवाओं ने बिना किसी पूर्व जानकारी या अनुमति के नादपुरम मुडी की पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करने का फैसला किया, जो अंततः एक खतरनाक स्थिति में बदल गया। अंधेरा होने के बाद जब ये युवा जंगल में फंस गए, तो स्थानीय निवासियों और वन विभाग को एक रात भर चलने वाले कठिन बचाव अभियान का नेतृत्व करना पड़ा।

क्यों यह चिंता का विषय है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि एक खतरनाक प्रवृत्ति है। युवा अक्सर सोशल मीडिया पर दिखने वाले स्टंट्स और रोमांचक वीडियो की नकल करने के लिए अनजान जल निकायों, घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों का चुनाव करते हैं। यह न केवल उनकी अपनी जान को खतरे में डालता है, बल्कि जंगली जानवरों के साथ टकराव और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने का जोखिम भी बढ़ाता है।

बिना तैयारी और गाइड के घने जंगलों में प्रवेश करना मौत को दावत देने जैसा है।

इस प्रवृत्ति का एक और गंभीर पहलू आर्थिक बोझ है। जब कोई युवा फंस जाता है, तो सरकार को भारी मात्रा में संसाधन और जनशक्ति खर्च करनी पड़ती है। उदाहरण के लिए, 2022 में मलमपुझा की चेराड पहाड़ी पर फंसे एक युवक को बचाने के लिए सरकार को लगभग ₹78 लाख खर्च करने पड़े थे।

कानूनी परिणाम और सुरक्षा

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रोमांच के नाम पर कानून तोड़ना भारी पड़ सकता है। केरल वन अधिनियम, 1961 की धारा 27 के तहत, प्रतिबंधित वन क्षेत्रों में घुसपैठ करने पर पांच साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। कोझिकोड के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) एम. जोशिल ने कहा कि स्थानीय लोगों को भी ऐसे अनधिकृत प्रवेशों को रोकने में मदद करनी चाहिए।

वर्तमान में, केरल के जंगलों में ट्रैकिंग को विनियमित किया गया है और प्रशिक्षित गाइडों के साथ ही अनुमति दी जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते रुझान को देखते हुए सरकार को जल्द ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करनी चाहिए, जैसा कि कर्नाटक ने किया है।

क्या आप जानते हैं?: बिना योजना के ट्रैकिंग करने वाले लोग अक्सर रास्ता भटक जाते हैं; ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आप रास्ता भटक जाएं, तो नीचे उतरने के बजाय ऊंचाई की ओर बढ़ें ताकि आप अन्य ट्रैकर्स को देख सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या जंगल में बिना अनुमति जाना अपराध है?
हाँ, केरल वन अधिनियम के तहत प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करना एक दंडनीय अपराध है।

प्रश्न 2: यदि मैं जंगल में रास्ता भटक जाऊं तो क्या करूं?
विशेषज्ञों के अनुसार, नीचे उतरने के बजाय ऊंचाई की ओर जाने का प्रयास करें ताकि आप अन्य लोगों की मदद पा सकें।