भारत में जनगणना 2027 के प्रश्नावली में नए शामिल किए गए कुछ प्रश्न, विशेष रूप से माता-पिता के विवरण और पहचान दस्तावेजों से संबंधित, राजनीतिक विवाद का कारण बन गए हैं। विपक्षी दलों ने इन प्रश्नों को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के साथ समानता के आधार पर निगरानी और 'गहरे दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य' के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया है।
- जनगणना 2027 के प्रश्नावली में 14 नए या संशोधित प्रश्न शामिल हैं।
- इनमें से आठ प्रश्न, जैसे माता-पिता का विवरण और पहचान पत्र, 2020 के राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में भी थे।
- विपक्षी दल गोपनीयता और निगरानी की चिंताओं को लेकर विरोध कर रहे हैं।
- सरकार ने 2020 में माता-पिता के जन्मतिथि और स्थान जैसे सवालों को वैकल्पिक बताया था।
- NPR एक निवासी रजिस्टर है, नागरिकता रजिस्टर नहीं, लेकिन कानून के तहत नागरिकता पंजीकरण से जुड़ा है।
नई दिल्ली: भारत में आगामी जनगणना 2027 की प्रक्रिया को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। जनगणना के लिए तैयार किए गए प्रश्नावली में कुछ नए और संशोधित प्रश्नों को लेकर विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस और वाम दलों ने चिंता जताई है। उनका आरोप है कि इन प्रश्नों को शामिल करने का उद्देश्य नागरिकों की निगरानी करना और एक 'गहरे दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य' को पूरा करना हो सकता है। यह विवाद विशेष रूप से इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि प्रश्नावली के कई प्रश्न 2020 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के लिए तैयार किए गए शेड्यूल में भी शामिल थे, जो उस समय नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध के बीच काफी विवादास्पद रहा था।
जनगणना प्रश्नावली में नए प्रश्न और NPR से जुड़ाव
जनगणना 2027 के लिए जनसंख्या गणना प्रश्नावली में कुल 40 प्रश्न हैं, जिनमें से 14 प्रश्न 2011 की जनगणना की तुलना में नए या संशोधित हैं। इन नए प्रश्नों में पति/पत्नी का नाम, घोषित राष्ट्रीयता, माता-पिता का विवरण, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/जाति, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता, उच्चतम शैक्षिक योग्यता और स्ट्रीम, कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी जानकारी शामिल है।
इनमें से आठ प्रश्न – घोषित राष्ट्रीयता, पिता का विवरण, माता का विवरण, मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस – 2020 के NPR शेड्यूल में भी पाए गए थे। विशेष रूप से, माता-पिता के जन्म की तारीख और स्थान (जिले और राज्य सहित) से संबंधित प्रश्न NPR के लिए विवादास्पद रहे थे। यदि माता-पिता का जन्म भारत के बाहर हुआ था, तो उस देश का विवरण भी मांगा गया था।
विवाद के मुख्य कारण: गोपनीयता और राजनीतिक संदर्भ
इस प्रश्नावली को लेकर दो मुख्य चिंताएं उभरी हैं: पहली, व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता और दूसरी, NPR को जिस राजनीतिक संदर्भ में फिर से शुरू किया गया है। गोपनीयता के संबंध में, यह तर्क दिया जा रहा है कि पारंपरिक रूप से जनगणना के आंकड़े जनसंख्या सांख्यिकी और योजना के लिए एकत्र किए जाते रहे हैं। हालांकि, नए प्रश्नावली में व्यक्तिगत जानकारी की एक विस्तृत श्रृंखला मांगी गई है, जिसमें ऐसे विवरण भी शामिल हैं जो व्यक्तियों की पहचान कर सकते हैं या उन्हें अन्य सरकारी डेटाबेस से जोड़ सकते हैं। इसलिए, सवाल यह नहीं है कि सरकार कितना डेटा एकत्र कर रही है, बल्कि यह है कि उस डेटा को कैसे संग्रहीत, सुरक्षित और उपयोग किया जाएगा।
दूसरी चिंता नागरिकता से जुड़ी है। NPR को देश के 'सामान्य निवासियों' का रजिस्टर बताया गया है, न कि नागरिकता का रजिस्टर। एक सामान्य निवासी वह व्यक्ति है जो कम से कम छह महीने से किसी स्थानीय क्षेत्र में रह रहा है या अगले छह महीने तक वहां रहने का इरादा रखता है; इसमें निवास मानदंड को पूरा करने वाला कोई विदेशी भी शामिल हो सकता है। हालांकि, NPR कानून के तहत भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003, जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने और नागरिक रजिस्टर तैयार करने के लिए उसके सत्यापन का प्रावधान करते हैं। नियमों में उन व्यक्तियों के लिए भी प्रावधान है जिनकी नागरिकता संदिग्ध मानी जाती है और उन्हें आगे की जांच के लिए चिह्नित किया जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सरकारी स्पष्टीकरण
2019-20 में, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित किया गया था और असम में NRC की पृष्ठभूमि थी, जिसमें लगभग 19 लाख लोग बाहर हो गए थे, तब तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार राष्ट्रव्यापी NRC की बात कही थी। इसी राजनीतिक संदर्भ ने NPR अभ्यास को एक अलग नजरिए से देखने पर मजबूर किया। एक ऐसा अभ्यास जो पहले बिना किसी खास विवाद के किया गया था, वह नागरिकता पर सवाल उठाए जाने की संभावना से जुड़ गया।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि NPR नया नहीं है। इसे पहली बार 2010 में 2011 की जनगणना के हाउस-लिस्टिंग चरण के साथ तैयार किया गया था और 2015 में घर-घर जाकर इसे अपडेट किया गया था। यह पिछली बार की तुलना में काफी कम विवादों के साथ हुआ था।
2020 में, सरकार ने इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया था। तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा था कि माता-पिता की जन्मतिथि और स्थान के बारे में विवादास्पद प्रश्न वैकल्पिक थे। यदि कोई व्यक्ति अपने माता-पिता की जन्मतिथि और स्थान याद रख पाता है, तो वह जानकारी प्रदान कर सकता है; यदि नहीं, तो कॉलम खाली छोड़े जा सकते हैं। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने भी आश्वासन दिया था कि केवल माता-पिता की जन्मतिथि या स्थान न जानने के कारण किसी की नागरिकता नहीं छीनी जाएगी, और ऐसे विवरण के लिए किसी दस्तावेजी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार ने यह भी कहा था कि NPR मुख्य रूप से निवासियों का एक डेटाबेस है जिसका उद्देश्य नीति निर्माण और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में सुधार करना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह?
BozokMedia analysis shows that the renewed inclusion of questions similar to the NPR in the Census 2027 questionnaire has reignited the debate around data privacy, surveillance, and the potential for these exercises to be linked to citizenship determination. While the government emphasizes the utility of such data for policy-making and service delivery, civil society groups and opposition parties remain wary of the potential for misuse, especially given the historical context of the CAA and NRC discussions. The balance between data collection for public good and safeguarding individual privacy and rights is at the heart of this ongoing controversy.
“जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के अभ्यास में व्यक्तिगत डेटा का संग्रह हमेशा एक नाजुक संतुलन का कार्य होता है, जहां राष्ट्रीय विकास की आवश्यकताएं व्यक्तिगत गोपनीयता और सुरक्षा की चिंताओं से टकराती हैं।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- जनगणना 2027 के प्रश्नावली में कौन से नए प्रश्न विवादास्पद हैं?
- क्या NPR और NRC एक ही हैं?