भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से इंजन और उन्नत प्रणालियों में अभी भी विदेशी निर्भरता बनी हुई है। यह विश्लेषण भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा पहल की वास्तविक स्थिति पर प्रकाश डालता है।

  • भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर है।
  • महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से इंजन, रडार और हथियार प्रणालियों में विदेशी निर्भरता बनी हुई है।
  • 'आत्मनिर्भर भारत' पहल में संरचनात्मक हार्डवेयर की तुलना में उन्नत प्रौद्योगिकियों में प्रगति धीमी है।

नई दिल्ली: भारत 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है, जहाँ रक्षा उत्पादन और निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। हालाँकि, एक गहन विश्लेषण से पता चलता है कि देश अभी भी कुछ महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, विशेष रूप से इंजन, उन्नत हथियार प्रणालियों और सेंसर के मामले में विदेशी निर्भरता से जूझ रहा है। यह विरोधाभास भारत के रक्षा आयात के आँकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो 2014-15 के स्तर से लगभग चार गुना है। वहीं, निर्यात ने भी 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को छुआ। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अब देश में निर्मित रक्षा उपकरणों का प्रतिशत लगभग 65% हो गया है, जो पहले 65-70% आयात पर निर्भर था। यह आँकड़े भारत की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहलों की सफलता की ओर इशारा करते हैं।

विदेशी निर्भरता के मूल कारण

इसके बावजूद, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आँकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। 2021-25 के बीच, भारत वैश्विक प्रमुख हथियारों के आयात का 8.2% हिस्सा था। SIPRI के आँकड़े केवल बड़े हथियारों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, न कि उन छोटे आयातित इंजनों, सेंसरों, इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों या पुर्जों पर जो भारत में निर्मित उपकरणों में लगे होते हैं। भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस अमेरिकी GE F404 इंजन पर उड़ता है, जो इस निर्भरता का एक प्रमुख उदाहरण है। कावेरी इंजन कार्यक्रम में दशकों के प्रयास के बावजूद, भारत अभी तक लड़ाकू विमानों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाला इंजन विकसित नहीं कर पाया है।

'सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची' का विश्लेषण

भारत टुडे के ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम द्वारा छह 'सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों' (PILs) का विश्लेषण किया गया, जिसमें 5,417 रक्षा वस्तुएँ शामिल थीं। इनमें से 2,500 वस्तुओं को पहले से ही स्वदेशी घोषित किया गया है, जबकि 2,917 को स्वदेशीकरण के लिए निर्धारित किया गया है। इन निर्धारित वस्तुओं में से 2,258 पुर्जे, घटक या सामग्री हैं।

तकनीकी अंतराल: कहाँ है असली चुनौती?

तकनीकी रूप से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि भारत का स्वदेशीकरण गैप विशेष रूप से प्रणोदन (Propulsion), इंजन, हथियार, रडार और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सबसे चौड़ा है। केवल 6% प्रणोदन, इंजन और ट्रांसमिशन आइटम, 8% हथियार और गोला-बारूद, और 14% रडार, संचार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नेविगेशन आइटम स्वदेशी घोषित किए गए हैं। सेंसर और ऑप्ट्रोनिक्स 25%, इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स और नियंत्रण 33%, और सामग्री, रसायन और उपभोग्य वस्तुएँ 48% पर हैं। इसके विपरीत, यांत्रिक और संरचनात्मक हार्डवेयर 69% के साथ काफी आगे है। यह पैटर्न बताता है कि भारत ने संरचनाओं और पारंपरिक हार्डवेयर में अधिक प्रगति की है, जबकि उन प्रौद्योगिकियों में पिछड़ रहा है जो किसी प्लेटफॉर्म की गति, पहचान, संचार और युद्ध क्षमता निर्धारित करती हैं।

सेनाओं में स्वदेशीकरण का स्तर

विभिन्न सेवाओं के बीच स्वदेशीकरण के स्तर में भिन्नता देखी गई है। वायु सेना से जुड़े समूहों में 2,447 में से 1,837 प्रविष्टियाँ पहले से ही स्वदेशी हैं। नौसेना में सबसे बड़ा अंतर है, जहाँ 1,211 में से 1,162 प्रविष्टियाँ अभी भी स्वदेशीकरण के लिए निर्धारित हैं। थल सेना बीच में है, और 653 प्रविष्टियाँ त्रि-सेवाओं के अंतर्गत आती हैं।

आयात निर्भरता में बदलाव

पिछले एक दशक में रूसी रक्षा आयात पर भारत की निर्भरता में भारी गिरावट आई है, जबकि फ्रांस और इज़राइल ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। मंत्रालय ने 2026-27 के पूंजी अधिग्रहण बजट का लगभग 75% यानी 1.39 लाख करोड़ रुपये घरेलू रक्षा उद्योगों के लिए आवंटित किया है। मंत्रालय की बजट टिप्पणी में कहा गया है कि 'वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान' ने आयात प्रतिस्थापन की आवश्यकता को और मजबूत किया है।

क्यों यह मायने रखता है

BozokMedia analysis shows... भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की राह में महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, प्रमुख प्रौद्योगिकियों में विदेशी निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास में भारी निवेश, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के लिए रणनीतिक साझेदारी विकसित करना आवश्यक है।

भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा पहल एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन असली चुनौती अब उन जटिल और उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में महारत हासिल करना है जो किसी भी देश की रक्षा क्षमताओं की रीढ़ हैं।
क्या आप जानते हैं?: भारत ने स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास को बढ़ावा देने के लिए 'सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों' (PILs) की शुरुआत की है, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण वस्तुओं को शामिल किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. भारत रक्षा उत्पादन में कितना आत्मनिर्भर हो गया है?
  2. किन प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में भारत अभी भी विदेशी आयात पर निर्भर है?