तमिलनाडु के थेनी जिले में पानी की भारी कमी और फसलों के बर्बाद होने के कारण किसानों ने जिला प्रशासन से जिले को 'सूखा प्रभावित' घोषित करने की पुरजोर मांग की है।

  • किसानों ने थेनी जिले को आधिकारिक रूप से 'सूखा प्रभावित' घोषित करने की मांग की है।
  • जल निकायों में अतिक्रमण और अनियमित सिंचाई के कारण फसलें सूख रही हैं।
  • गन्ना उत्पादकों ने राजश्री शुगर द्वारा भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया।
  • किसानों ने फसलों के भंडारण के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे और स्थायी खरीद केंद्रों की मांग की है।

तमिलनाडु के थेनी जिले में कृषि संकट गहराता जा रहा है। शुक्रवार को आयोजित मासिक शिकायत निवारण बैठक में बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने जिला कलेक्टर आर. वैरिनाथन के समक्ष अपनी व्यथा सुनाई। किसानों का आरोप है कि सिंचाई के लिए पानी का वितरण अनियमित है और जलमार्गों में बढ़ते अतिक्रमण के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे कई खेत पूरी तरह सूख चुके हैं।

बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण बहस तब हुई जब अधिकारियों ने बताया कि जिले में औसत वार्षिक वर्षा (384 मिमी) की तुलना में अब तक 398 मिमी वर्षा हो चुकी है। हालांकि, किसानों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि समस्या वर्षा की मात्रा नहीं, बल्कि जल प्रबंधन की विफलता और वितरण की अव्यवस्था है। उन्होंने चेतावनी दी कि टेल-एंड (अंतिम छोर) क्षेत्रों के किसान इस सीजन में खेती छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केवल वर्षा के आंकड़ों पर निर्भर रहना कृषि संकट का समाधान नहीं है। यदि जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो थेनी जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

किसानों ने विशेष रूप से कोट्टकुडी और करईमडाई के बीच फसलों के सूखने और वैगई बांध के आसपास के नारियल के पेड़ों को तत्काल पानी की आवश्यकता का मुद्दा उठाया। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करेंगे।

जल प्रबंधन में विफलता और बुनियादी ढांचे की कमी केवल फसल नुकसान नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक-आर्थिक संकट का संकेत है।

गन्ना उत्पादकों ने राजश्री शुगर द्वारा बकाया भुगतान न किए जाने का मुद्दा भी उठाया। कलेक्टर ने निर्देश दिया कि भुगतान वरिष्ठता के आधार पर किया जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए साप्ताहिक आधार पर भुगतान विवरण प्रदर्शित किया जाए। इसके अलावा, किसानों ने प्याज और टमाटर जैसी उपज के लिए कम लागत वाले भंडारण केंद्रों और साल भर चलने वाले प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों (DPC) की मांग की है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तमिलनाडु के दक्षिणी जिले अक्सर वर्षा के पैटर्न में बदलाव और सिंचाई परियोजनाओं के अधूरे कार्यान्वयन के कारण सूखे की चपेट में आते रहे हैं। थेनी, जो अपनी कृषि उत्पादकता के लिए जाना जाता है, वर्तमान में जल वितरण की कुप्रबंधन की समस्या से जूझ रहा है।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन की कमी से न केवल फसलें बर्बाद होती हैं, बल्कि यह भूजल स्तर को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है?

Frequently Asked Questions

1. किसान जिले को सूखा प्रभावित क्यों घोषित करवाना चाहते हैं?
ताकि उन्हें फसलों के नुकसान के लिए सरकारी मुआवजा मिल सके और ऋण माफी जैसी राहतें प्राप्त हो सकें।

2. किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में सूखा घोषित करना, बकाया भुगतान, बेहतर भंडारण सुविधाएं और स्थायी खरीद केंद्र शामिल हैं।