सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को पलट दिया है जिसमें डीएमके सांसद दयानिधि मरान के मामले में केंद्रीय दूरसंचार सचिव को गवाह के रूप में बुलाने का निर्देश दिया गया था।

  • सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय के मार्च 25 के आदेश को रद्द कर दिया है।
  • न्यायालय ने दयानिधि मरान को दूरसंचार सचिव को 'बचाव पक्ष के गवाह' के रूप में बुलाने की अनुमति दी है।
  • यह मामला अवैध टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने के आरोपों से संबंधित है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें केंद्रीय दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल को डीएमके सांसद दयानिधि मरान के खिलाफ चल रहे मामले में अदालत के गवाह के रूप में बुलाने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने सीबीआई (CBI) द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उच्च न्यायालय के 25 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हालांकि उच्च न्यायालय का आदेश रद्द कर दिया गया है, लेकिन मरान को रक्षा पक्ष के गवाह के रूप में सचिव को बुलाने का विकल्प दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस दौर का है जब दयानिधि मरान 2004 से 2007 के बीच यूपीए-1 सरकार में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री थे। सीबीआई का आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और अपने विभिन्न आवासों पर निजी टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किए, जिनका उपयोग सन नेटवर्क के व्यावसायिक लेनदेन के लिए किया गया था।

इससे पहले, मद्रास उच्च न्यायालय ने तर्क दिया था कि सचिव की गवाही यह निर्धारित करने के लिए प्रासंगिक है कि क्या मरान उस अवधि के दौरान सेवा-श्रेणी के टेलीकॉम कनेक्शन के हकदार थे। हालांकि, निचली अदालत ने अक्टूबर 2025 में इस प्रार्थना को खारिज कर दिया था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के वर्गीकरण (न्यायालय बनाम बचाव पक्ष) के बीच के सूक्ष्म अंतर को रेखांकित करता है। यह निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी अधिकारियों को राजनीतिक मामलों में सीधे 'अदालत के गवाह' के रूप में घसीटने के बजाय, कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।

यह फैसला कानूनी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने और जांच एजेंसियों की स्वायत्तता को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Did You Know?: टेलीफोन एक्सचेंज मामले में यह विवाद दो दशक पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ा है।

Frequently Asked Questions

1. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बारे में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें सचिव को 'कोर्ट विटनेस' बनाने को कहा गया था, लेकिन मरान को उन्हें 'डिफेंस विटनेस' के रूप में बुलाने की अनुमति दी है।

2. दयानिधि मरान पर मुख्य आरोप क्या हैं?
उन पर अपने मंत्री रहते हुए अवैध टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित कर निजी व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने का आरोप है।