भारतीय नौसेना द्वारा ₹1,943 करोड़ में दो MQ-9B सी-गार्जियन ड्रोन लीज पर लेने के फैसले ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं कि क्या ये महंगे ड्रोन चीन की चुनौती से निपटने के लिए जरूरी हैं या सस्ते कामिकेज़ ड्रोन बेहतर विकल्प हैं।
- भारतीय नौसेना ₹1,943 करोड़ में दो MQ-9B सी-गार्जियन ड्रोन 30 महीनों के लिए लीज पर ले रही है।
- विवाद का मुख्य बिंदु महंगे HALE UAVs बनाम सस्ते कामिकेज़ ड्रोन्स की प्रभावशीलता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए ये ड्रोन अनिवार्य हैं।
- रक्षा मंत्रालय की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची 405 आयातित वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाती है।
भारतीय नौसेना के हालिया रक्षा सौदे ने रक्षा गलियारों में एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है। ₹1,943 करोड़ के अनुबंध के तहत, भारत दो MQ-9B सी-गार्जियन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन को 30 महीनों के लिए लीज पर लेने की प्रक्रिया में है। जहां एक ओर यह कदम समुद्री निगरानी को मजबूत करेगा, वहीं दूसरी ओर आलोचकों ने इसकी लागत और उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं।
बहस का केंद्र यह है कि क्या ये महंगे अमेरिकी ड्रोन वास्तव में 'सफेद हाथी' साबित होंगे। यूक्रेन और ईरान के युद्धक्षेत्रों से सबक लेते हुए, कई सैन्य विशेषज्ञ अब सस्ते, बड़े पैमाने पर उत्पादित 'कामिकेज़' ड्रोन्स की ओर देख रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने भी युद्ध के दौरान लगभग 45 रीपर ड्रोन्स का नुकसान उठाया है, जो इन महंगे उपकरणों की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक खरीद नहीं, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत की 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति को देखते हुए, निरंतर निगरानी के लिए उच्च क्षमता वाले ड्रोन्स की तत्काल आवश्यकता है।
स्वदेशी विकल्प विकसित होने तक, विदेशी तकनीकी लीजिंग भारत के लिए एक अपरिहार्य सामरिक आवश्यकता है।
पैनलिस्टों, वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा और एयर मार्शल संजीव कपूर ने तर्क दिया है कि हालांकि सस्ते ड्रोन प्रभावी हैं, लेकिन वे MQ-9 जैसे उच्च-स्तरीय निगरानी क्षमताओं का मुकाबला नहीं कर सकते। भारत के पास वर्तमान में ऐसे स्वदेशी विकल्प मौजूद नहीं हैं जो तत्काल इस स्तर की निगरानी प्रदान कर सकें।
इसी बीच, रक्षा मंत्रालय ने अपनी छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenization List) जारी की है। इसमें 405 वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिसका उद्देश्य घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। यह कदम दर्शाता है कि भारत लंबी अवधि में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अल्पकालिक सुरक्षा जरूरतों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता बनी रहेगी।
Frequently Asked Questions
1. MQ-9B सी-गार्जियन क्या है?
यह एक उच्च-ऊंचाई वाला, लंबे समय तक उड़ने वाला ड्रोन है जो समुद्री निगरानी और खुफिया जानकारी एकत्र करने के लिए उपयोग किया जाता है।
2. स्वदेशीकरण सूची का क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह सूची आयात को कम करके भारतीय रक्षा निर्माताओं को अधिक अवसर प्रदान करेगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाएगी।