एक नई किताब 'बेस्पोकन' (Bespoken) ने सैविल रो के प्रसिद्ध मास्टर टेलर एंड्रयू एम रामरूप की छिपी हुई भारतीय विरासत को दुनिया के सामने ला दिया है। यह कहानी लखनऊ से त्रिनिदाद तक के एक संघर्षपूर्ण सफर और वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की है।

  • सैविल रो के प्रसिद्ध मास्टर टेलर एंड्रयू एम रामरूप की जड़ें वास्तव में भारत से जुड़ी हैं।
  • उनकी पूर्वज लखनऊ की रहने वाली लुचमिन थीं, जो 1889 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में त्रिनिदाद गई थीं।
  • अशोक कुमार बाल द्वारा लिखित नई पुस्तक 'बेस्पोकन: फ्रॉम ट्यूनापुना टू बकिंघम पैलेस' इस ऐतिहासिक सत्य को उजागर करती है।

लंदन के प्रतिष्ठित सैविल रो (Savile Row) में काम करने वाले विश्व प्रसिद्ध मास्टर टेलर एंड्रयू एम रामरूप को लंबे समय तक अफ्रीकी मूल का माना जाता रहा है। हालांकि, पूर्व सिविल सेवक अशोक कुमार बाल द्वारा लिखित नई पुस्तक 'बेस्पोकन: फ्रॉम ट्यूनापुना टू बकिंघम पैलेस' (Bespoken: From Tunapuna to Buckingham Palace) ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। यह पुस्तक रामरूप की उस विरासत को सामने लाती है, जिसे दुनिया अब तक गलत समझती रही है।

एक अनकही विरासत: लखनऊ से त्रिनिदाद तक का सफर

रामरूप की कहानी वास्तव में भारत के लखनऊ से शुरू होती है। उनकी परदादी, लुचमिन, एक 26 वर्षीय विधवा थीं, जो अपने नौ साल के बेटे मुन्नाओ के साथ 1889 में गिरमिटिया मजदूर (indentured labourer) के रूप में कलकत्ता से त्रिनिदाद के लिए रवाना हुई थीं। जहाज के सफर के दौरान उनकी मुलाकात भैरव प्रसाद से हुई, जिनसे उन्होंने शादी की। यही वह वंश है जिसने आगे चलकर दुनिया के सबसे बेहतरीन दर्जी में से एक को जन्म दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता की नहीं है, बल्कि यह उस प्रवासी भारतीय इतिहास का प्रमाण है जिसने अनजाने में वैश्विक संस्कृति और शिल्प कौशल (craftsmanship) को आकार दिया है। रामरूप का सफर गरीबी से निकलकर बकिंघम पैलेस तक के रसूखदार लोगों की पसंद बनने का है।

"मीडिया साक्षात्कार क्षणिक होते हैं, लेकिन एक पुस्तक स्थायी होती है। अशोक बाल ने मुझे इस महत्वपूर्ण सच्चाई को सुधारने का अवसर दिया है," एंड्रयू रामरूप ने कहा।

रामरूप ने अपनी सफलता के शिखर पर पहुँचकर भी कभी अपनी पहचान को लेकर शोर नहीं मचाया। उन्होंने कहा कि वे 'काले' रंग को अपनी पहचान मानते थे, लेकिन अफ्रीकी मूल के रूप में नहीं। अब, यह पुस्तक उनके जीवन के उस महत्वपूर्ण हिस्से को दर्ज करती है जिसे अब तक अनदेखा किया गया था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

19वीं सदी के अंत में, हजारों भारतीयों को गिरमिटिया मजदूरों के रूप में ब्रिटिश उपनिवेशों में ले जाया गया था। इन मजदूरों ने न केवल कठिन परिस्थितियों का सामना किया, बल्कि नई जगहों पर अपनी संस्कृति और कौशल को भी जीवित रखा, जैसा कि रामरूप के मामले में देखा गया।

Did You Know?: एंड्रयू रामरूप के पास दुनिया के सबसे प्रसिद्ध क्रिकेटरों और हॉलीवुड सितारों जैसे ब्रायन लारा और सैमुअल एल जैक्सन के सूट सिलने का हुनर है।

Frequently Asked Questions

1. एंड्रयू रामरूप की असली विरासत क्या है?
उनकी असली विरासत भारतीय है; उनके पूर्वज लखनऊ से त्रिनिदाद गए थे।

2. 'बेस्पोकन' पुस्तक के लेखक कौन हैं?
इस पुस्तक के लेखक पूर्व सिविल सेवक अशोक कुमार बाल हैं।