मैसूर में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए 2.2 किलोमीटर लंबे सड़क खंड पर व्हाइट-टॉपिंग का काम शुरू कर दिया गया है। विधायक तन्वीर सैत ने इस परियोजना का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य दशहरा उत्सव से पहले इसे पूरा करना है।

  • मैसूर के मणिपाल अस्पताल सर्कल से मिलेनियम सर्कल तक 2.2 किमी सड़क का काम शुरू।
  • दशहरा उत्सव से पहले सड़क को यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य।
  • शहर की 12 प्रमुख सड़कों के व्हाइट-टॉपिंग के लिए ₹121 करोड़ आवंटित।
  • परियोजना में फुटपाथ, ड्रेनेज और पारंपरिक लाइटों का विकास शामिल है।

कर्नाटक के सांस्कृतिक केंद्र मैसूर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। विधायक और पूर्व मंत्री तन्वीर सैत ने शनिवार को मणिपाल अस्पताल सर्कल से मिलेनियम सर्कल तक 2.2 किलोमीटर लंबे सड़क खंड पर 'व्हाइट-टॉपिंग' कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर में बढ़ते वाहनों के दबाव को कम करना और सड़कों की उम्र बढ़ाना है। श्री सैत ने बताया कि राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के माध्यम से शहर की 12 प्रमुख सड़कों के व्हाइट-टॉपिंग के लिए पर्याप्त धन जारी किया है। इस पूरी योजना के लिए कुल ₹121 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से शुरुआती चरण में ₹67 करोड़ की लागत वाली परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मैसूर जैसे पर्यटन प्रधान शहर के लिए सड़क का बुनियादी ढांचा अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्हाइट-टॉपिंग न केवल सड़कों के रखरखाव की लागत को कम करती है, बल्कि यह अत्यधिक गर्मी में सड़क की सतह को ठंडा रखने में भी मदद करती है, जिससे डामर वाली सड़कों की तुलना में यह अधिक टिकाऊ साबित होती है।

सड़कों का व्हाइट-टॉपिंग न केवल यातायात को सुगम बनाता है, बल्कि यह भविष्य के शहरी विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।

यह कार्य विशेष रूप से मैसूर के विश्व प्रसिद्ध दशहरा उत्सव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। त्योहार के दौरान शहर में लाखों पर्यटकों के आगमन की संभावना है, जिससे यातायात का दबाव काफी बढ़ जाता है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस 2.2 किमी के खंड को दशहरा शुरू होने से पहले पूरी तरह से तैयार कर लिया जाए।

परियोजना का दायरा काफी व्यापक है। इसमें केवल सड़क की सतह को सफेद करना ही शामिल नहीं है, बल्कि सड़कों के किनारे पेवर ब्लॉक लगाना, फुटपाथों का विकास, आरसीसी (RCC) नालियों का निर्माण और बारिश के पानी की निकासी के लिए कल्वर्ट बनाना भी शामिल है। इसके अलावा, सड़क के डिवाइडर पर पारंपरिक इलेक्ट्रिक लाइटें लगाई जाएंगी ताकि शहर की विरासत और सुंदरता बनी रहे।

Did You Know?: व्हाइट-टॉपिंग तकनीक सड़कों के 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव को कम करने में मदद करती है, जिससे शहर का तापमान नियंत्रित रहता है।

Frequently Asked Questions

1. व्हाइट-टॉपिंग क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
व्हाइट-टॉपिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सड़क की सतह को कंक्रीट या विशेष सामग्री से कवर किया जाता है, जिससे सड़क अधिक टिकाऊ होती है और रखरखाव का खर्च कम हो जाता है।

2. इस परियोजना का कुल बजट कितना है?
मैसूर की 12 प्रमुख सड़कों के लिए कुल ₹121 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।