उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने डेयरी उत्पादों में भारी मिलावट का खुलासा किया है। जांच में खोया बनाने के लिए डिटर्जेंट, टेलकम पाउडर और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे खतरनाक रसायनों का उपयोग पाया गया है।
- यूपी में खोया और डेयरी उत्पादों में डिटर्जेंट, टेलकम पाउडर और रिफाइंड तेल की मिलावट पाई गई।
- FSDA ने कानपुर क्षेत्र में छापेमारी कर लाखों रुपये का मिलावटी सामान नष्ट किया।
- दोषी निर्माताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू।
- त्योहारी सीजन को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की हालिया जांच में यह खुलासा हुआ है कि राज्य में डेयरी उत्पादों, विशेषकर 'खोया' के निर्माण में डिटर्जेंट, टेलकम पाउडर, रिफाइंड तेल और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहारों के मद्देनजर, प्रशासन ने मिलावटखोरों के खिलाफ एक व्यापक अभियान छेड़ दिया है।
हाल ही में कानपुर देहात और कानपुर नगर जिलों में की गई छापेमारी के दौरान, 24 टीमों ने विभिन्न खोया निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने 28 नमूने एकत्र किए और लगभग 1.50 लाख रुपये मूल्य के मिलावटी खाद्य पदार्थों और संदिग्ध मिलावट एजेंटों को मौके पर ही नष्ट कर दिया। प्रशासन ने न केवल नमूने लिए हैं, बल्कि दोषी इकाइयों और ब्रांडों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं।
कानपुर में छापेमारी का विवरण
कानपुर देहात के रसूलबाद क्षेत्र के बादशाहपुर गांव में एक खोया निर्माण इकाई पर छापेमारी के दौरान, प्रवर्तन टीम को क्रीम निकालने वाली मशीन, खोया भट्टियां, स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP) और हाइड्रोजन पेरोक्साइड बरामद हुआ। अधिकारियों ने मौके पर ही लगभग 100 किलोग्राम तैयार खोया नष्ट कर दिया। इसके अलावा, 175 पैकेट स्किम्ड मिल्क पाउडर और 15 लीटर हाइड्रोजन पेरोक्साइड भी जब्त किया गया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 274 और 275 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
एक अन्य इकाई में सैफलाइट (Saifolite) नामक रसायन का उपयोग पाया गया, जिसका उपयोग खोया की बनावट बदलने के लिए किया जा रहा था। वहीं झिंझक के भोला नगर में एक इकाई को अत्यंत अस्वच्छ परिस्थितियों में चलते हुए पाया गया, जहां रिफाइंड सोयाबीन तेल और स्किम्ड मिल्क पाउडर का उपयोग करके खोया तैयार किया जा रहा था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि खाद्य मिलावट केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है। त्योहारों के दौरान डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने पर मुनाफाखोरी के लिए रसायनों का उपयोग करना सीधे तौर पर मानव जीवन के साथ खिलवाड़ है। यदि इन रसायनों का नियमित सेवन किया जाए, तो यह दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग का नया रुख यह सुनिश्चित करता है कि कार्रवाई केवल लैब रिपोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि दोषी ब्रांडों पर राज्यव्यापी प्रतिबंध भी लगाया जाए।
FSDA के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी ब्रांड के उत्पादों में हानिकारक रसायन या विदेशी वसा (foreign fat) पाई जाती है, तो सरकार उस ब्रांड की बिक्री पर पूरे राज्य में प्रतिबंध लगा सकती है। यह प्रतिबंध राज्य के बाहर निर्मित और यूपी में बेचे जाने वाले उत्पादों पर भी लागू होगा।
Frequently Asked Questions
1. खोया में किन प्रमुख रसायनों का उपयोग मिलावट के लिए किया जा रहा है?
जांच में डिटर्जेंट, टेलकम पाउडर, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, रिफाइंड तेल और स्किम्ड मिल्क पाउडर का उपयोग पाया गया है।
2. यदि किसी ब्रांड का उत्पाद मिलावटी पाया जाता है तो क्या कार्रवाई होगी?
सरकार उस ब्रांड की बिक्री पर पूरे राज्य में प्रतिबंध लगा सकती है और निर्माता का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।