राइट‑टू‑इन्फो (RTI) रिपोर्ट ने खुलासा किया कि 2025‑26 में लुतींस दिल्ली के केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों की मरम्मत पर ऐतिहासिक ₹92 करोड़ खर्च हुए। मुख्य कारणों में जलरोक, दीमक संक्रमण और पुरानी संरचनात्मक कमजोरियां शामिल हैं।
- 2025‑26 में ₹92 करोड़ खर्च
- सेपेज और दीमक संक्रमण मुख्य कारण
- भवनों की उम्र बढ़ने से रखरखाव लागत बढ़ी
भारत सरकार के मध्यस्थता द्वारा जारी किए गए नवीनतम RTI उत्तर ने दर्शाया है कि वित्तीय वर्ष 2025‑26 में लुतींस दिल्ली में स्थित केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक बंगलों की मरम्मत पर कुल मिलाकर रिकॉर्ड ₹92 करोड़ खर्च हुए। यह आंकड़ा पिछले वर्षों के औसत खर्च से लगभग दो‑तीन गुना अधिक है।
दस्तावेज़ में बताया गया कि मुख्य रूप से जलरोक (सीपेज) की समस्या, दीमक संक्रमण और पुरानी इंटीरियर फिक्स्चर की क्षति को सुधारने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई। इन बंगलों में कई दशकों से रहने वाले मंत्रियों के परिवारों के लिए ये समस्याएँ लगातार बढ़ती जा रही थीं, जिससे तत्काल मरम्मत आवश्यक हो गई।
लुतींस दिल्ली के बंगलों का निर्माण 1920‑1930 के दशक में ब्रिटिश राज के दौरान हुआ था और आज वे राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्य हैं। हालांकि, समय के साथ इन संरचनाओं में फटे‑फटे दीवारें, क्षतिग्रस्त छत और ध्वस्त होती नींव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो गईं, जो नियमित रखरखाव के बिना महँगा हो जाता है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि के तौर पर, 2010‑15 के बीच इन बंगलों पर औसत वार्षिक रखरखाव खर्च लगभग ₹15‑20 करोड़ रहा था। 2020‑21 में यह राशि ₹48 करोड़ तक बढ़ी, लेकिन 2025‑26 में अचानक ₹92 करोड़ तक पहुंच जाना एक अभूतपूर्व वृद्धि है, जो कि सरकारी संपत्तियों की उम्र बढ़ने और आज के मौसम परिवर्तन के कारण भी प्रेरित हो सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the soaring upkeep costs reflect broader challenges in managing heritage properties while meeting modern security and comfort standards. The fiscal impact may prompt a review of budget allocations for official residences and could spark debates on transparency and cost‑effectiveness in public spending.
"यदि इन बंगलों का पुनर्निर्माण नहीं किया गया तो दीर्घकालिक सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्य दोनों जोखिम में पड़ सकते हैं," कहता है रियल एस्टेट विशेषज्ञ डॉ. अंजली मेहता।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सभी केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों पर समान खर्च आया?
उत्तर: नहीं, खर्च बंगलों की स्थिति, स्थान और आवश्यक मरम्मत की गंभीरता के आधार पर भिन्न‑भिन्न रहा।
प्रश्न 2: क्या भविष्य में ऐसी बड़ी राशि की आवश्यकता कम होगी?
उत्तर: विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि संरचनात्मक सुधार और नियमित रखरखाव योजनाबद्ध रूप से लागू किया गया तो भविष्य में खर्च घटाया जा सकता है।