केरल के कालीकट विश्वविद्यालय में छात्र संघ के 'अस्वीकार्य व्यवहार' के कारण शिक्षकों ने जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है, जिसके बाद रजिस्ट्रार को अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- कालीकट विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सी.डी. सेबेस्टियन को विभाग छात्र संघ (DSU) के अध्यक्ष का अस्थायी प्रभार दिया गया है।
- कुलपति पी. रवींद्रन ने बताया कि छात्र संघ के अधिकारियों के 'अस्वीकार्य व्यवहार' के कारण कोई भी शिक्षक पद संभालने को तैयार नहीं है।
- छात्र संघ के सचिव के. सबाह तनवीर ने विश्वविद्यालय के आरोपों को निराधार बताया है और राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया है।
केरल के मलाप्पुरम जिले में स्थित कालीकट विश्वविद्यालय में प्रशासनिक संकट गहरा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक अभूतपूर्व निर्णय लेते हुए रजिस्ट्रार सी.डी. सेबेस्टियन को विभाग छात्र संघ (DSU) के अध्यक्ष का अस्थायी प्रभार सौंप दिया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर, तेनिपलम स्थित विभिन्न शिक्षण विभागों के निर्वाचित छात्र निकाय के प्रबंधन के लिए लिया गया है।
विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता (Dean, Students’ Welfare) के. फाज़ुल रहमान द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कुलपति पी. रवींद्रन ने यह कठोर कदम उठाया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विश्वविद्यालय के शिक्षक छात्र संघ के पदाधिकारियों के 'अस्वीकार्य व्यवहार' के कारण इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार नहीं हैं। यह स्थिति शैक्षणिक संस्थानों में छात्र राजनीति और शिक्षक प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह उच्च शिक्षा संस्थानों में बिगड़ते अनुशासन और छात्र राजनीति के अनियंत्रित स्वरूप का संकेत है। जब शिक्षक स्वयं को छात्र नेताओं के व्यवहार से असुरक्षित महसूस करने लगते हैं, तो यह विश्वविद्यालय की समग्र शैक्षणिक संस्कृति के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
छात्र राजनीति का अनियंत्रित होना और शिक्षकों का जिम्मेदारी से पीछे हटना, शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन के पतन का स्पष्ट लक्षण है।
इससे पहले, इतिहास विभाग के प्रोफेसर पी. शिवदासन को इस पद के लिए चुना गया था, लेकिन उन्होंने अपनी अन्य शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं (जैसे राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख की जिम्मेदारी और दक्षिण भारतीय इतिहास कांग्रेस के महासचिव का पद) का हवाला देते हुए इनकार कर दिया।
दूसरी ओर, छात्र संघ (DSU) के सचिव के. सबाह तनवीर ने विश्वविद्यालय के दावों को पूरी तरह से 'निराधार' करार दिया है। तनवीर का आरोप है कि प्रशासन कुछ विशेष छात्र समूहों, विशेष रूप से 2025 के चुनावों के दौरान हंगामा करने वाले मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी अस्थिरता के कारण पूर्व अध्यक्ष वी.ए. शहाना को इस्तीफा देना पड़ा था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: रजिस्ट्रार को यह जिम्मेदारी क्यों दी गई?
उत्तर: क्योंकि छात्र संघ के व्यवहार के कारण कोई भी शिक्षक अध्यक्ष का पद संभालने को तैयार नहीं था।
प्रश्न 2: छात्र संघ का इस पर क्या कहना है?
उत्तर: छात्र संघ के सचिव ने इन आरोपों को निराधार बताया है और प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया है।