पालघर के ग्रामीण इलाकों में कई बच्चे रोज़ाना बिना किसी सुरक्षित पुल या फ़ेन्स के, खतरनाक रेलवे ट्रैक को पार करके स्कूल पहुँचते हैं। यह अनदेखी सुरक्षा समस्या कई जानलेवा दुर्घटनाओं का कारण बन रही है।

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  • बच्चे सुरक्षित पुल के अभाव में ट्रैक पार करते हैं
  • पिछले वर्ष में 12 दुर्घटनाएँ दर्ज हुईं
  • स्थानीय प्रशासन ने समाधान के वादे किए हैं लेकिन कार्य धीमा है

पालघर जिले के एक छोटे से गाँव में बच्चों को स्कूल पहुँचने के लिए प्रतिदिन लगभग 300 मीटर रेलवे ट्रैक को पार करना पड़ता है। इस मार्ग में न तो सुरक्षा फेंसिंग है और न ही कोई प्रदर्शित पादचारी पुल, जिससे छोटे‑बड़े सभी उम्र के छात्र जोखिम में पड़ते हैं।

स्थानीय स्कूल के प्रधानाचार्य श्री अजय पाटिल ने बताया कि लगभग 150 छात्र इस खतरनाक मार्ग का प्रयोग करते हैं और कई बार ट्रेनों की तेज़ गति के कारण घबराहट की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। “हमने कई बार ट्रेनों को देखा है जो 80 किमी/घंटा की रफ़्तार से गुजरती हैं, और बच्चे अक्सर उन्हें देखते ही डर जाते हैं,” उन्होंने कहा।

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में इस क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर 12 चोटिल दुर्घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जिनमें से 3 में गंभीर चोटें आईं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर डॉ. मीरा शिंदे ने कहा, “ट्रैक के पास स्कूल के बच्चों में चोटों की दर बढ़ी है, और कई मामलों में पैर की हड्डी टूटने जैसी गंभीर चोटें हुई हैं।”

वर्तमान में पालघर जिला प्रशासन ने इस समस्या को हल करने के लिए एक अस्थायी समाधान के रूप में पुलिस गश्त बढ़ा दी है, लेकिन स्थायी समाधान जैसे पादचारी पुल या फेंसिंग की कमी बनी हुई है। जिला प्रमुख श्री रवि बोरकर ने कहा, “हम जल्द ही इस दिशा में एक विस्तृत योजना तैयार करेंगे, परन्तु बजट एवं तकनीकी चुनौतियों के कारण कार्य में देरी हो रही है।”

Historical Background

महाराष्ट्र में पिछले दशक में कई ग्रामीण इलाकों में इसी तरह की समस्याएँ देखी गईं, विशेषकर कोल्हापुर और नासिक के आसपास। 2018 में कोल्हापुर के एक गाँव में इसी कारण 5 छात्रों की मौत हो गई थी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पादचारी सुरक्षा के लिए नई दिशानिर्देश जारी किए गए।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that unsafe railway crossings in rural India not only jeopardize child education but also contribute to higher dropout rates and long‑term socioeconomic setbacks for entire communities.

"एक सुरक्षित पादचारी पुल न केवल बच्चों की जान बचा सकता है, बल्कि उनकी शिक्षा की निरंतरता भी सुनिश्चित करता है," कहते हैं सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रजत गुप्ता
Did You Know?: भारत में हर साल लगभग 1,500 पादचारी ट्रैक दुर्घटनाएँ होती हैं, जिनमें से 30% से अधिक बच्चे होते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या पालघर में पादचारी पुल के निर्माण की कोई निश्चित तिथि है?
अभी तक कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने अगले वित्तीय वर्ष में इसे प्राथमिकता देने का वादा किया है।

Q2: क्या स्कूल के बच्चों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है?
वर्तमान में कुछ स्कूलों ने बच्चों को ट्रैक के पास स्थित अस्थायी बेंच और सुरक्षा संकेतक स्थापित करने की पहल की है, लेकिन यह समाधान अस्थायी माना जा रहा है।