प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गोवा में एक महिला के साथ हुई 2.6 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी की जांच करते हुए देशव्यापी साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा किया है। इस गिरोह ने 20 राज्यों के 330 से अधिक पीड़ितों से लगभग 417 करोड़ रुपये ठगे हैं।
- ED ने गोवा में डिजिटल अरेस्ट मामले की जांच के दौरान दो आरोपियों, फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को गिरफ्तार किया।
- पूरे भारत में 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 163 FIR दर्ज हैं, जिनमें कुल 417.49 करोड़ रुपये की ठगी शामिल है।
- धोखेबाजों ने RBI लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स और फर्जी कंपनियों का उपयोग करके धन को विदेशी मुद्रा में बदला।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन के तहत गोवा में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ की गई है जिसने 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया। गिरफ्तार आरोपियों, फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को PMLA अधिनियम की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया है।
इस पूरे मामले की शुरुआत पिछले साल गोवा की एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई FIR से हुई, जिसे डरा-धमकाकर 2.6 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था। जालसाजों ने पीड़िता को विश्वास दिलाया कि यह पैसा "गुप्त पर्यवेक्षण खातों" (secret supervision accounts) में जा रहा है। जांच में पता चला कि यह केवल एक स्थानीय घटना नहीं थी, बल्कि एक विशाल अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this case highlights a dangerous evolution in cybercrime, where fraudsters are no longer just using fake apps but are integrating licensed financial entities to wash money. The use of "shell directors"—poor individuals like drivers and low-wage employees—to front these companies makes it incredibly difficult for law enforcement to trace the real kingpins.
जांच के दौरान यह पाया गया कि ठगी की गई राशि को पहले निष्क्रिय (dormant) और नए खुले खातों में डाला गया, और फिर इसे 400 से अधिक लाभार्थी खातों में विभाजित कर दिया गया। इस नेटवर्क में कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा विनिमय (forex) संस्थाएं शामिल थीं। इन संस्थाओं ने कुल 27,850 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग लेनदेन किया और लगभग 2,904 करोड़ रुपये नकद जमा किए।
"डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी हेरफेर का एक घातक मिश्रण है, जो आम नागरिकों को कानून के डर से लूटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।"
ED ने मुंबई और गोवा में 20 से अधिक परिसरों पर छापेमारी की, जिसके परिणामस्वरूप 3.25 करोड़ रुपये नकद और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। यह नेटवर्क इतना जटिल था कि 101 मामलों में एक ही पीड़ित का पैसा नेटवर्क की दो या अधिक अलग-अलग संस्थाओं में घुमाया गया था ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
Frequently Asked Questions
1. डिजिटल अरेस्ट क्या है?
यह एक साइबर धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उन्हें घर में ही 'कैद' रहने को कहते हैं, फिर पैसे वसूलते हैं।
2. इस मामले में कुल कितनी राशि की ठगी हुई?
ED के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से 20 राज्यों में लगभग 417.49 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई है।