चुनाव बॉडी प्रमुख ने बताया कि भारत में उपयोग होने वाले ईवीएम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा निर्मित होते हैं और इनमें इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई‑फाई जैसी कोई वायरलेस सुविधा नहीं होती। उन्होंने छात्रों को सूचना के स्रोत की पुष्टि करने की सलाह दी।

  • ईवीएम सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा निर्मित होते हैं
  • इनमें इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई‑फाई नहीं होते
  • सूचना साझा करने से पहले स्रोत सत्यापित करना आवश्यक

मुख्य बयान

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बारे में मीडिया में उठे सवालों के जवाब में चुनाव बॉडी के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ये मशीनें भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा निर्मित होती हैं और इनमें कोई भी इंटरनेट, ब्लूटूथ या वाई‑फाई कनेक्टिविटी नहीं होती। यह तथ्य चुनाव में तकनीकी सुरक्षा के उच्च मानकों को दर्शाता है।

तकनीकी विवरण

ईवीएम में उपयोग होने वाले माइक्रोकंट्रोलर और सॉफ्टवेयर पूरी तरह से ऑफ़लाइन चलाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। डेटा एन्क्रिप्शन, दो-स्तरीय प्रमाणन और फिजिकल टैंपर-प्रूफ़ केसिंग जैसी सुरक्षा उपायों के साथ, इन उपकरणों को हैक या रिमोट एक्सेस से बचाया जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत ने 1999 में पहली बार ईवीएम का प्रयोग किया और तब से 2024 तक लगातार उन्नत संस्करण अपनाए हैं। प्रारंभिक मॉडल में कुछ सीमित वायरलेस परीक्षण किए गए थे, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं के कारण सभी वायरलेस कार्यक्षमता को हटाकर पूरी तरह ऑफ़लाइन रखा गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the absence of any wireless connectivity in EVMs reduces the risk of cyber‑interference, reinforcing public confidence in the electoral process at a time when misinformation spreads rapidly online.

“ऑफ़लाइन ईवीएम तकनीक चुनाव की पारदर्शिता और सुरक्षा का सबसे बड़ा स्तंभ है,” कहा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अजय मेहरा ने।
Did You Know?: भारत में पहली ईवीएम 1999 के राष्ट्रीय चुनाव में इस्तेमाल हुई थी, और तब से इस तकनीक ने 1.5 अरब से अधिक मतों को सुरक्षित रूप से दर्ज किया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या ईवीएम में कोई रिमोट अपडेट की संभावना है?

उत्तर: नहीं, सभी अपडेट केवल फिजिकल रूप से, नियंत्रित पर्यावरण में किए जाते हैं।

प्रश्न 2: यदि ईवीएम को इंटरनेट के साथ जोड़ा जाए तो क्या हो सकता है?

उत्तर: यह सुरक्षा जोखिम बढ़ाएगा और वर्तमान नियामक मानकों के खिलाफ होगा।