कॉल सेंटर के माध्यम से ममता बनर्जी ने भाजपा पर जनगणना, कल्याण योजना और मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगाया, और कहा कि वह राजनीति से संन्यास नहीं लेगी।
- ममता बनर्जी ने राजनीतिक संन्यास को खारिज किया
- भाजपा पर जनगणना और कल्याण योजनाओं में हस्तक्षेप का आरोप
- वोटर सूची में छंटनी को चुनौती देने का इरादा
भाजपा पर तीखा हमला
त्रिणामूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को फेसबुक लाइव के माध्यम से कहा कि वह राजनीतिक ‘सन्न्यास’ नहीं लेगी और भाजपा को ‘अंधेरे में धकेलने’ तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने पार्टी को जनता को भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आने के चार महीने में लोगों ने भाजपा का ‘सच्चा चेहरा’ देख लिया है।
जनगणना को राष्ट्रीय पंजीकरण का दरवाज़ा बताया
बनर्जी ने जनगणना को ‘राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण’ (NRC) का बैकडोर प्रयास कहा और कहा कि यह प्रक्रिया बिना किसी राजनीतिक दल की सलाह के लागू की गई। उन्होंने लोगों से चेतावनी दी कि जनगणना फॉर्म पर हस्ताक्षर करने और व्यक्तिगत डेटा साझा करने से उनकी बचत खतरे में पड़ सकती है।
आनंदपुरा भंडार योजना पर विवाद
विधान में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई ‘आनंदपुरा भंडार’ योजना में देरी की शिकायतों को लेकर बनर्जी ने भाजपा पर ‘धर्म और जाति’ के आधार पर लाभार्थियों को हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “भाजपा ने पूर्व वादे को तोड़ते हुए महिलाओं को धोखा दिया है।”
जादवपुर विश्वविद्यालय में संघर्ष
जादवपुर विश्वविद्यालय में एबीवीपी और लेफ्ट छात्रों के बीच हिंसा के बीच बनर्जी ने भाजपा को ‘वैंडलिज़्म’ का कूटा लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम कुछ छात्रों से असहमत हैं, पर उनका सम्मान करते हैं।”
मतदाता सूची में ‘स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन’
भाजपा सरकार द्वारा किए गए विशेष इंटेन्सिव रिवीजन में लाखों वास्तविक मतदाताओं को हटाया गया, ऐसा बनर्जी का कहना है। वह आवश्यक समझती हैं कि यदि जरूरत पड़े तो सुप्रीम कोर्ट में पुनः याचना की जाएगी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that बनर्जी का यह बयान राज्य‑स्तर के राजनीति में भाजपा के उदय को रोकने की रणनीतिक दिशा को स्पष्ट करता है, जिससे आगामी लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों की गतिशीलता पर गहरा असर पड़ेगा।
"यदि बनर्जी इस संघर्ष को जारी रखती हैं, तो पश्चिम बंगाल में भाजपा को गंभीर राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा," कहा राजनीतिक विश्लेषक अंजली शर्मा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बनर्जी ने जनगणना के खिलाफ क्यों आवाज़ उठाई?
उत्तर: उनका मानना है कि यह प्रक्रिया बिना पारदर्शिता के चल रही है और यह नागरिकों के डेटा को जोखिम में डाल सकती है।
प्रश्न 2: विशेष इंटेन्सिव रिवीजन में कितने मतदाताओं को हटाया गया?
उत्तर: आधिकारिक आँकड़े नहीं निकल पाए हैं, पर बनर्जी ने कहा है कि यह “लाखों” स्तर का है।