दिल्ली जल बोर्ड ने 2026 की ‘रीक्लेम्ड वाटर पॉलिसी’ के तहत निर्माण, बागवानी और लैंडस्केपिंग में उपचारित जल को अनिवार्य करने की योजना जारी की। यह कदम शहर की जल सुरक्षा और सतत विकास को मजबूत करेगा।

  • दिल्ली में 750 MGD सीवेज का उपचार, 483 MGD पुन: उपयोग योग्य
  • 2026 से निर्माण स्थल पर उपचारित जल अनिवार्य
  • 2026‑2036 में 100% गैर‑पीने योग्य आवश्यकताओं के लिए पुनः उपयोग लक्ष्य

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने रीक्लेम्ड वाटर पॉलिसी, 2026 को मंजूरी दी, जिससे शहर के निर्माण, बागवानी और लैंडस्केपिंग कार्यों में उपचारित जल का अनिवार्य उपयोग हो जाएगा। जल मंत्री परवेश साहिब सिंह ने मंगलवार को बताया कि राजधानी प्रतिदिन लगभग 750 मिलियन गैलन (MGD) सीवेज का उपचार करती है, जिसमें से 483 MGD पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध है, पर वर्तमान में केवल 120 MGD ही उपयोग में लाया जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले दो दशकों में दिल्ली की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी है, जिससे पीने योग्य जल की माँग में इज़ाफ़ा हुआ है। 2010 में शुरू हुई जल पुनः उपयोग पहल ने सीमित सफलता दिखाई, लेकिन 2026 की नई नीति के साथ जल संरक्षण के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई गई है। इस नीति के तहत उपचारित जल को न केवल निर्माण बल्कि हरित क्षेत्र, औद्योगिक शीतलीकरण और सफ़ाई जैसे गैर‑पीने योग्य कार्यों में उपयोग किया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that Delhi’s shift to reclaimed water could reduce groundwater extraction by up to 30% by 2036, setting a benchmark for other Indian metros grappling with water scarcity.

“Treating wastewater as a resource rather than a waste stream is the cornerstone of sustainable urban development,” says Dr. Meera Joshi, Water Resources Expert.

नई नीति के तहत उपचारित जल की आपूर्ति का मूल्य 8 रुपये प्रति किलोलिटर निर्धारित किया गया है, जबकि स्वयं‑परिवहन करने वाले उपभोक्ताओं को 5 रुपये प्रति किलोलिटर की दर मिलेगी। 2027 से जल उपचार शुल्क में 5% वार्षिक वृद्धि भी लागू होगी।

निर्माण स्थलों के लिए, 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक के क्षेत्रों में धूल नियंत्रण, क्योरिंग, धुलाई और सड़क जलापूर्ति के लिए उपचारित जल का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा। बड़े उपभोक्ता क्रमिक रूप से ताज़ा जल की जगह उपचारित जल को अपनाएंगे, जिसका लक्ष्य 2036 तक सभी गैर‑पीने योग्य आवश्यकताओं के लिए 100% पुनः उपयोग है।

फार्महाउसों के लिए भी जल लाइनें बिछाई जाएँगी, जहाँ प्रति एकड़ 10,000 रुपये मासिक शुल्क और एक‑बार 1 लाख रुपये की बुनियादी ढांचा लागत लगेगी। 100 एकड़ या उससे अधिक के फार्महाउसों के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

Did You Know?: दिल्ली का वर्तमान जल उपचार क्षमता 1,015 MGD है, और केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार इसे 1,500 MGD तक बढ़ाने की योजना है।

Frequently Asked Questions

क्या सभी निर्माण कंपनियों को तुरंत उपचारित जल उपयोग करना पड़ेगा?
हाँ, 500 वर्ग मीटर से बड़े सभी निर्माण साइटों को नीति के लागू होने के बाद उपचारित जल का उपयोग अनिवार्य होगा।

क्या यह नीति घरों में भी लागू होगी?
वर्तमान में नीति मुख्यतः निर्माण, बागवानी और औद्योगिक उपयोग पर केंद्रित है; भविष्य में आवासीय उपयोग के लिए विस्तारित किया जा सकता है।