बिश्केक में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि मानवता के हित में अब युद्ध के बजाय शांति की ओर बढ़ना अनिवार्य है।
- पीएम मोदी ने रूस से 'अंतहीन युद्ध' को समाप्त कर शांति की ओर बढ़ने का आग्रह किया।
- 2026 की पहली छमाही में भारत-रूस व्यापार टर्नओवर में 2.6% की वृद्धि हुई।
- विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पुष्टि की कि युद्ध में 51 भारतीयों की जान गई है।
- राष्ट्रपति पुतिन ने आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने की पुष्टि की।
बिश्केक में एक महत्वपूर्ण राजनयिक मुलाकात के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन में जारी संघर्ष का राजनयिक समाधान खोजने का आग्रह किया। द्विपक्षीय बैठक की शुरुआती टिप्पणियों में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दुनिया निरंतर युद्ध की स्थिति को सहन नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, "हमें अंतहीन युद्ध से दूर हटकर युद्ध के अंत की ओर बढ़ना चाहिए।"
यह अपील भारत द्वारा अपनाए गए निरंतर राजनयिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। सितंबर 2022 में, मोदी ने प्रसिद्ध रूप से कहा था कि "यह युद्ध का युग नहीं है," और बाद में जुलाई 2024 में उन्होंने जोर दिया कि युद्ध के मैदान में समाधान नहीं खोजे जा सकते। शांति प्रक्रिया को "मानवता की पुकार" बताकर, प्रधानमंत्री ने गांधी और बुद्ध की विरासत का हवाला देते हुए अहिंसक समाधान की वकालत की।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) का रास्ता अपना रहा है। जहाँ एक ओर भारत ने अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति से बचाने के लिए रूस से ऊर्जा आयात कर आर्थिक संबंधों को मजबूत रखा है, वहीं दूसरी ओर वह खुद को एक वैश्विक शांतिदूत के रूप में स्थापित कर रहा है। यह दोहरी रणनीति भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित रखने और पश्चिमी शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखने में मदद करती है।
"ग्लोबल साउथ और क्रेमलिन के बीच एक सेतु के रूप में भारत की भूमिका पीएम मोदी को उन चुनिंदा नेताओं में से एक बनाती है, जिनका शांति संदेश पुतिन वास्तव में गंभीरता से ले सकते हैं।"
संघर्ष के अलावा, दोनों नेताओं ने 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' पर चर्चा की। राष्ट्रपति पुतिन ने संबंधों की मजबूती पर जोर देते हुए बताया कि 2026 की पहली छमाही में व्यापार टर्नओवर में 2.6% की वृद्धि हुई है। उन्होंने मानवीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले दशक में रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या सात गुना बढ़ गई है, जो अब लगभग 40,000 है।
हालांकि, बैठक में एक दुखद पहलू भी सामने आया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने खुलासा किया कि रूसी सेना में भर्ती हुए 227 भारतीयों में से 51 की युद्ध में मृत्यु हो चुकी है। भारत सरकार वर्तमान में डिस्चार्ज किए गए 139 कर्मियों की सुरक्षित वापसी के लिए मॉस्को के साथ समन्वय कर रही है।
भविष्य की ओर देखते हुए, यह राजनयिक गति 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान चरम पर होगी, जहाँ राष्ट्रपति पुतिन के भारत आने की उम्मीद है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ की तैयारियों का भी हिस्सा होगी।
| मानक | स्थिति/विवरण |
|---|---|
| व्यापार वृद्धि (H1 2026) | +2.6% |
| रूस में भारतीय छात्र | ~40,000 |
| पर्यटक आदान-प्रदान (2025) | +16% |
| युद्ध में भारतीय हताहत | 51 मृत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का आधिकारिक रुख क्या है?
भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता है और मानता है कि युद्ध का मैदान समाधान का स्थान नहीं है।
प्रश्न 2: मोदी और पुतिन के बीच अगली बड़ी बैठक कब है?
दोनों नेताओं के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मिलने की उम्मीद है।