केरल सरकार ने पागल, लाइलाज रूप से बीमार या खतरनाक आवारा कुत्तों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दे दी है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया है ताकि मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल सरकार ने आवारा कुत्तों के लिए इच्छामृत्यु की SOP मंजूर की।
  • यह कदम पागल, लाइलाज रूप से बीमार या अत्यधिक आक्रामक कुत्तों पर लागू होगा।
  • प्रत्येक स्थानीय निकाय में एक 'आवारा कुत्ता प्रबंधन समिति' का गठन किया जाएगा।
  • इच्छामृत्यु केवल योग्य पशु चिकित्सकों द्वारा और निर्धारित रसायनों के माध्यम से ही की जाएगी।

केरल में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और रेबीज से होने वाली मौतों के बीच, राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। शनिवार को सरकार ने पागल, लाइलाज रूप से बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक आवारा कुत्तों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दे दी। यह निर्णय इस साल मई में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ऐसे मामलों में इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई थी।

केरल में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में राज्य में कुत्तों के काटने के कुल 3.69 लाख मामले दर्ज किए गए, जो 2024 के 3.17 लाख मामलों से अधिक हैं। इसके साथ ही, रेबीज के कारण 33 लोगों की जान गई। हालांकि राज्य में 'एनिमल बर्थ कंट्रोल' (ABC) कार्यक्रम चल रहा है, लेकिन कुत्तों की बढ़ती आबादी के मुकाबले नसबंदी की गति काफी धीमी है। उदाहरण के लिए, तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सालाना 1,200 कुत्तों की नसबंदी होती है, जबकि आबादी नियंत्रण के लिए 4,000-5,000 का लक्ष्य आवश्यक है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय मानव जीवन की सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश है। जब सार्वजनिक सुरक्षा और संवेदी जीवों के कल्याण के बीच टकराव होता है, तो संवैधानिक संतुलन अनिवार्य रूप से मानव जीवन के संरक्षण की ओर झुकना चाहिए। यह SOP प्रशासन को कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है ताकि वे बिना किसी डर के सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों से निपट सकें।

मानव जीवन की रक्षा सर्वोपरि है, और यह SOP वैज्ञानिक और कानूनी प्रोटोकॉल के माध्यम से पशु क्रूरता को कम करते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय: इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को अत्यधिक विनियमित किया गया है। प्रत्येक स्थानीय निकाय में एक आवारा कुत्ता प्रबंधन समिति बनाई जाएगी, जिसमें स्थानीय निकाय अध्यक्ष, वार्ड पार्षद, पशु चिकित्सा अधिकारी और पशु कल्याण बोर्ड का प्रतिनिधि शामिल होगा। यह समिति तय करेगी कि क्या कोई कुत्ता वास्तव में खतरनाक है।

इच्छामृत्यु केवल एक योग्य पशु चिकित्सक द्वारा ही की जाएगी। इसके लिए केवल सोडियम पेंटोबार्बिटाल या थियोपेंटाल सोडियम जैसे रसायनों का उपयोग किया जाएगा ताकि कुत्ते को दर्द न हो। इसके अलावा, सभी स्थानीय निकायों को एक अलग रजिस्टर बनाए रखना होगा जिसमें पकड़े गए कुत्ते की तस्वीर, स्थान और इच्छामृत्यु का सटीक कारण दर्ज हो।

Historical Background

केरल में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। जुलाई 2025 में, राज्य सरकार ने पशु क्रूरता निवारण नियमों के तहत बीमार कुत्तों के प्रबंधन की अनुमति दी थी, लेकिन केरल उच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी थी। अंततः, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने स्थानीय निकायों को स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान किए कि वे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं।

Did You Know?: रेबीज एक लगभग 100% घातक बीमारी है, लेकिन यदि लक्षण दिखने से पहले समय पर टीका लगा लिया जाए, तो इससे बचा जा सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या सभी आवारा कुत्तों को मारा जाएगा?
नहीं, यह केवल उन कुत्तों के लिए है जो पागल हैं, लाइलाज रूप से बीमार हैं या अत्यधिक आक्रामक/खतरनाक हैं।

प्रश्न 2: इस प्रक्रिया की निगरानी कौन करेगा?
स्थानीय निकायों द्वारा गठित 'आवारा कुत्ता प्रबंधन समिति' और पशु चिकित्सा अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।