डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को मिली 21 दिनों की फरलोय ने विवाद खड़ा कर दिया है। सिख नेताओं ने सवाल उठाया है कि बलात्कार के दोषी को बार-बार रिहाई क्यों मिल रही है, जबकि सजा पूरी कर चुके 'बंदी सिंह' अब भी जेल में हैं।
- राम रहीम को जेल से बाहर आने का यह 17वां मौका है।
- सिख नेताओं ने 'बंदी सिंहों' की रिहाई और जगतार सिंह हव्वारा की parole की मांग तेज कर दी है।
- सिख संगठनों का आरोप है कि देश में दोहरे कानून का पालन हो रहा है।
हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल से डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को मंगलवार को 21 दिनों की फरलोय दी गई। इस निर्णय ने एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक गलियारों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सिख समुदाय के नेताओं ने इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अकाल तख्त जत्थेदार गियानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने इस निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जिन लोगों को बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के लिए सजा मिली है, उन्हें बार-बार 'पिकनिक' मनाने की तरह रिहा किया जा रहा है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि एक तरफ राम रहीम को बार-बार राहत दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर 'बंदी सिंह', जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, वे आज भी सलाखों के पीछे हैं।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति की रिहाई का नहीं, बल्कि न्याय की समानता का है। राम रहीम को 2017 में सजा होने के बाद से अब तक 17 बार जेल से बाहर आने का मौका मिल चुका है। यह बार-बार मिलने वाली राहत सिख समुदाय की भावनाओं को आहत कर रही है, जो लंबे समय से 'बंदी सिंहों' की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
सिख नेताओं का तर्क है कि जब एक बलात्कार का दोषी बार-बार फरलोय पा सकता है, तो सजा पूरी कर चुके राजनीतिक कैदियों को क्यों नहीं?
सिख संगठनों के साथ-साथ जगतार सिंह हव्वारा का मामला भी चर्चा में है। हव्वारा, जो 1995 में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद काट रहे हैं, अपनी बीमार मां से मिलने के लिए parole की मांग कर रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी राज्यपाल से हव्वारा को 10 दिन की parole देने का समर्थन किया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
'बंदी सिंह' शब्द उन सिख कैदियों के लिए उपयोग किया जाता है जो 1990 के दशक के पंजाब उग्रवाद के दौरान शामिल होने के आरोप में जेल में हैं। Qaumi Insaaf Morcha जनवरी 2023 से चंडीगढ़ और मोहाली में इन कैदियों की रिहाई के लिए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
Frequently Asked Questions
1. 'बंदी सिंह' कौन हैं?
बंदी सिंह उन सिख कैदियों को कहा जाता है जो 1990 के दशक के पंजाब उग्रवाद के दौर के दौरान सजा काट रहे हैं।
2. राम रहीम को अब तक कितनी बार फरलोय मिली है?
राम रहीम को 2017 में सजा मिलने के बाद से अब तक कुल 17 बार जेल से बाहर आने का मौका मिल चुका है।