गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम और नागालैंड सरकारों को जुलाई में आई विनाशकारी बाढ़ के कारणों पर विस्तृत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 3 नवंबर तक की समय सीमा तय की है।

  • गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम और नागालैंड सरकारों को नोटिस जारी किया है।
  • अदालत ने 3 नवंबर तक विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है।
  • जनहित याचिका में अवैध खनन और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
  • जुलाई की बाढ़ में 80 से अधिक लोगों की जान गई और लाखों लोग प्रभावित हुए।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने पूर्व कांग्रेस विधायक देबब्रत सैकिया द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ा रुख अपनाते हुए असम और नागालैंड की सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों राज्यों के संबंधित अधिकारियों को 3 नवंबर तक इस मामले पर विस्तृत हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है। यह याचिका जुलाई में असम के कई जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद दायर की गई थी, जिसने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया था।

अवैध खनन और प्रशासनिक विफलता के आरोप

सैकिया ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि दिखो नदी (Dikhow River) में हो रहे अवैध रेत और पत्थर के खनन ने बाढ़ की विभीषिका को और अधिक बढ़ा दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासन ने पिछली अदालती टिप्पणियों और चेतावनियों के बावजूद अवैध खनन को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। विशेष रूप से, असम-नागालैंड सीमा के पास नदी के तल में किए जा रहे अनियंत्रित उत्खनन से नदी का प्राकृतिक मार्ग बदल गया है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल प्राकृतिक आपदा का नहीं, बल्कि नीतिगत विफलता और न्यायिक आदेशों की अवहेलना का है। यदि अवैध खनन और बांधों से पानी छोड़े जाने जैसे कारकों की न्यायिक जांच होती है, तो यह भविष्य में अंतर-राज्यीय जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मिसाल कायम करेगा।

अवैध खनन और प्रशासनिक निष्क्रियता ने प्राकृतिक आपदा को एक मानवीय त्रासदी में बदल दिया है।

याचिका में नागालैंड के मोकॉकचुंग और वोखा जिलों में ओपन-कास्ट कोयला खनन और डोयांग हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से पानी छोड़े जाने के संभावित प्रभावों पर भी चिंता जताई गई है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया है कि यह जांचना आवश्यक है कि असम में बार-बार आने वाली बाढ़ को रोकने के लिए अधिकारियों ने अब तक क्या उपाय किए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि देबब्रत सैकिया ने 2018 और 2019 में भी इसी तरह की याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें दिखो नदी में अनियंत्रित खनन के प्रति आगाह किया गया था। 2019 में न्यायालय ने एक समर्पित 'खनिज और खनिज कार्य बल बटालियन' बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन याचिकाकर्ता के अनुसार, इन आदेशों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन नहीं किया गया।

Did You Know?: दिखो नदी में अनियंत्रित खनन से नदी का तल गहरा हो जाता है, जिससे मानसून के दौरान पानी का बहाव अनियंत्रित होकर आसपास के गांवों में घुस जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अदालत ने सरकारों को क्या निर्देश दिया है?
उत्तर: अदालत ने असम और नागालैंड सरकारों को जुलाई की बाढ़ के कारणों और निवारक उपायों पर 3 नवंबर तक हलफनामा देने का निर्देश दिया है।

प्रश्न 2: याचिका में मुख्य चिंता क्या है?
उत्तर: मुख्य चिंता दिखो नदी में अवैध खनन और नागालैंड के बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण होने वाली बाढ़ है।