मैसूर के लिंगंबुद्धि लेक पार्क में वन विभाग द्वारा प्रवेश शुल्क लागू करने के निर्णय से स्थानीय नागरिकों और वॉकर्स में भारी आक्रोश है। विरोध स्वरूप रविवार को बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
- वन विभाग ने लिंगंबुद्धि लेक पार्क के लिए प्रवेश शुल्क लागू करने का निर्णय लिया है।
- स्थानीय वॉकर्स कमेटी ने इस फैसले को 'दिनदहाड़े लूट' करार देते हुए विरोध किया है।
- प्रस्तावित शुल्क 1 सितंबर, 2026 से प्रभावी होगा।
- नागरिकों ने रविवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।
मैसूर के प्रसिद्ध लिंगंबुद्धि लेक पार्क में वन विभाग द्वारा प्रवेश शुल्क (Entry Fee) लागू करने के हालिया प्रस्ताव ने स्थानीय निवासियों और नियमित रूप से पार्क में टहलने वाले लोगों के बीच एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। लिंगंबुद्धि पार्क वॉकर्स कमेटी के नेतृत्व में नागरिकों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और विभाग को एक ज्ञापन सौंपकर इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
शुल्क संरचना का विवरण
वन विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह नया शुल्क नियम 1 सितंबर, 2026 से लागू किया जाएगा। प्रस्तावित दरों में सामान्य जनता के लिए ₹10 प्रतिदिन और ₹250 मासिक पास शामिल है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए मासिक पास ₹200 निर्धारित किया गया है। बच्चों के लिए दरें ₹5 प्रतिदिन और ₹100 मासिक रखी गई हैं। विभाग का तर्क है कि पार्क के रखरखाव के लिए पर्याप्त धन की कमी है और सरकारी आदेशों के तहत वन उद्यानों में शुल्क लेना वैध है।
नागरिकों का तर्क और आक्रोश
वॉकर्स कमेटी, लिंगंबुद्धि मित्रर बालागा और एआईडीवाईओ (AIDYO) के सदस्यों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि पार्क और झीलें सार्वजनिक संपत्ति हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नागरिक पहले से ही संपत्ति कर (Property Tax) के माध्यम से पार्कों के रखरखाव के लिए कर देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों सहित सभी पर एक और शुल्क लगाना क्या दिनदहाड़े लूट नहीं है?"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह विवाद शहरी सार्वजनिक स्थानों के निजीकरण और सरकारी वित्त पोषण के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। जब सार्वजनिक संपत्तियों के रखरखाव का बोझ सीधे नागरिकों पर डाला जाता है, तो यह सामाजिक असंतोष का कारण बनता है, विशेष रूपकर उन समुदायों में जो स्वास्थ्य और प्रकृति के लिए इन स्थानों पर निर्भर हैं।
सार्वजनिक पार्कों का रखरखाव सरकार की जिम्मेदारी है, न कि नागरिकों पर अतिरिक्त कर लगाने का माध्यम।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
लिंगंबुद्धि झील मैसूर की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। झील के आसपास का क्षेत्र आरक्षित वन (Reserve Forest) घोषित किया गया है, जिसके तहत लगभग 80 एकड़ वन भूमि को पार्क के रूप में विकसित किया गया है। अब तक इसका रखरखाव विभागीय कोष से किया जा रहा था, लेकिन वित्तीय संकट के कारण विभाग अब राजस्व मॉडल की ओर रुख कर रहा है।
| श्रेणी | दैनिक शुल्क (₹) | मासिक पास (₹) |
|---|---|---|
| सामान्य जनता | 10 | 250 |
| वरिष्ठ नागरिक | - | 200 |
| बच्चे | 5 | 100 |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: नया शुल्क कब से लागू होगा?
उत्तर: प्रस्तावित शुल्क 1 सितंबर, 2026 से लागू होने वाला है।
प्रश्न 2: वॉकर्स का मुख्य विरोध क्या है?
उत्तर: वॉकर्स का कहना है कि वे पहले से ही टैक्स देते हैं और सार्वजनिक संपत्तियों के लिए अलग से शुल्क देना अनुचित है।