केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने ड्रोन खतरों से निपटने के लिए 'ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया' (DFI) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह कदम विमानन, परमाणु और अंतरिक्ष जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

  • CISF और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के बीच समझौता हुआ।
  • उद्देश्य: ड्रोन तकनीक और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाना।
  • संवेदनशील क्षेत्र: विमानन, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और तेल रिफाइनरी।
  • CISF देश भर में 370 महत्वपूर्ण इकाइयों की सुरक्षा करता है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बल ने हाल ही में ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा कर्मियों की ड्रोन-रोधी (counter-drone) क्षमताओं को विकसित करना और तेजी से विकसित हो रही हवाई चुनौतियों से निपटना है।

यह समझौता विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है जहाँ सुरक्षा की आवश्यकता अत्यंत उच्च है, जैसे कि विमानन (Aviation), परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power), अंतरिक्ष (Space) और तेल रिफाइनरी (Oil Refineries)। CISF वर्तमान में देश भर में 370 महत्वपूर्ण इकाइयों की सुरक्षा का जिम्मा संभालता है और इन प्रतिष्ठानों पर हवाई खतरों से निपटने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नामित है।

तकनीकी क्षमता और अनुसंधान

इस MoU के माध्यम से, CISF भारतीय ड्रोन स्टार्टअप्स और प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगा। इससे न केवल क्षमता निर्माण (capacity building) में मदद मिलेगी, बल्कि व्यावहारिक अनुसंधान और परिचालन तैयारियों को भी बल मिलेगा। बल का लक्ष्य ड्रोन तकनीक के प्रसार से उत्पन्न होने वाले जटिल खतरों का समय रहते पता लगाना और उन्हें बेअसर करना है।

ड्रोन तकनीक के प्रसार के साथ, अनियंत्रित ड्रोन का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक परिचालन अनिवार्यता बन गया है।

बोजोकमीडिया विश्लेषण (BozokMedia Analysis)

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम भारत की आंतरिक सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। जैसे-जैसे ड्रोन का उपयोग निगरानी से लेकर हमले तक बढ़ रहा है, सुरक्षा बलों को पारंपरिक तरीकों से हटकर तकनीकी रूप से उन्नत होना होगा। CISF द्वारा अब तक 3,000 कर्मियों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल में प्रशिक्षित किया जा चुका है, जो इस दिशा में एक मजबूत आधार है।

ऐतिहासिक रूप से, सुरक्षा बल मुख्य रूप से जमीनी खतरों पर ध्यान केंद्रित करते थे, लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से, बल ने हवाई सुरक्षा और ड्रोन निगरानी की ओर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में, CISF की 80 इकाइयां निरंतर निगरानी और खतरे का पता लगाने के लिए पहले से ही ड्रोन का उपयोग कर रही हैं।

क्या आप जानते हैं?: CISF को भारत में हवाई खतरों से निपटने के लिए आधिकारिक 'नोडल एजेंसी' के रूप में नियुक्त किया गया है।

Frequently Asked Questions

1. CISF का मुख्य कार्य क्या है?
CISF देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों जैसे हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों और तेल रिफाइनरियों की सुरक्षा करता है।

2. इस नए समझौते का क्या लाभ होगा?
इससे सुरक्षा बलों को नवीनतम ड्रोन तकनीक और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर काम करने और नए खतरों से निपटने में मदद मिलेगी।