मानसून की विफलता के कारण कर्नाटक सरकार ने राज्य के 101 तालुकों में सूखे की स्थिति की आधिकारिक घोषणा की है। भूजल स्तर में भारी गिरावट और बांधों में कम पानी के कारण कृषि संकट गहरा गया है।

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  • कर्नाटक के 101 तालुकों में सूखे की आधिकारिक घोषणा की गई है।
  • राज्य में औसत वर्षा 666 मिमी होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 465 मिमी दर्ज की गई।
  • भूजल स्तर 10 वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया है।
  • विपक्ष ने किसानों के लिए 1 लाख रुपये तक के ऋण माफी की मांग की है।

बेंगलुरु: कर्नाटक में मानसून की विफलता ने राज्य के कृषि परिदृश्य को गंभीर संकट में डाल दिया है। राजस्व मंत्री और उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि राज्य के 101 तालुकों में सूखे की स्थिति बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, 102 से अधिक तालुकों में गंभीर जल संकट देखा जा रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

वर्षा का संकट और गिरता जल स्तर

राज्य में वर्षा के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आती है। सामान्यतः कर्नाटक में 666 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल 465 मिमी वर्षा ही हुई है। इस कमी के कारण न केवल खेती प्रभावित हुई है, बल्कि जल भंडारण भी गंभीर रूप से कम हो गया है। पिछले वर्ष इसी समय बांधों में 815.7 TMC पानी उपलब्ध था, जो इस वर्ष घटकर केवल 684 TMC रह गया है।

भूजल की स्थिति और भी भयावह है। लगभग 132 तालुकों में भूजल स्तर पिछले 10 वर्षों के औसत से 1,000 फीट से अधिक नीचे चला गया है। सरकार ने स्थिति का आकलन करने के लिए 134 सूखा प्रभावित तालुकों में अधिकारियों की टीमें भेज दी हैं, जिनमें से 89 तालुकों में अत्यधिक सूखा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि कर्नाटक की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर निर्भर है। वर्षा की यह भारी कमी न केवल खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह को भी बाधित करेगी। यदि केंद्र सरकार से 1,239 करोड़ रुपये का SDRF फंड समय पर नहीं मिलता है, तो राज्य के लिए राहत कार्यों का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण होगा।

मानसून की अनियमितता और गिरता भूजल स्तर कर्नाटक के कृषि भविष्य के लिए एक आसन्न संकट का संकेत है।

राजनीतिक घमासान और विपक्ष की मांग

सरकार की इस घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष के नेता अशोक ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वास्तव में 175 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाना चाहिए था। उन्होंने सरकार से मांग की है कि किसानों को राहत देने के लिए उनके ऋणों को 1 लाख रुपये तक माफ किया जाना चाहिए।

Did You Know?: कर्नाटक के कई हिस्सों में भूजल स्तर में गिरावट का मुख्य कारण अत्यधिक दोहन और वर्षा की कमी का संयोजन है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कर्नाटक में कितने तालुकों में सूखा घोषित किया गया है?
उत्तर: सरकार ने आधिकारिक तौर पर 101 तालुकों में सूखे की घोषणा की है, जिनमें से 89 में गंभीर स्थिति है।

प्रश्न 2: सरकार ने राहत के लिए क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: सरकार ने अधिकारियों की टीमें भेजी हैं और केंद्र से 1,239 करोड़ रुपये के SDRF फंड की मांग की है।